गुरुवार की शाम छह बजे अपने दो कलेजे टुकड़ों सहित गंगा की धार में छलांग लगाने वाली मंजू को जब बाहर निकाल लिया गया। अस्पताल में जब उसकी नजर अपने मृत बेटे पर प़डी तो मां की ममता बिलख उठी। वह चीख चीख कर अपनी मौत की भीख मांगने लगी।
डाक्टर से गुहार लगा रही थी कि डाक्टर साहब, मुझे नहीं जीना है, मुझे जहर का इंजेक्शन लगा दो। मैं अपनी नरकीय जिंदगी से आजाद होना चाहती हूं। लेकिन उसकी यह फरियाद सुनकर डाक्टर सहित सभी लोग द्रवित हो गए। सभी की आंखे नम हो गई। वह कह रही थी कि परिवार वाले मुझे न मरने दे रहे हैं और ना ही जीने दे रहे हैं। अब और सहन नहीं होता। इसलिए मुझे मर जाने दो।
हर मां अपने बच्चों के सुखद भविष्य की कामना करती है, लेकिन आज एक मां की ममता की इंतहा दिखी, वह अपने बच्चों को अपने साथ इसलिए मौत देना चाहती थी, ताकि उसके बाद उन्हें कोई परेशान करे। मंजू सिसकते हुए टूटते शब्दों में बोली, वह तो इसलिए अपने बच्चों को साथ लाई थी, ताकि उसके बच्चे मरने के बाद भी उससे जुदा न हो।
उसके मरने के बाद उनका ख्याल कौन रखता, उन्हें भी उसकी तरह परेशान किया जाता, दर दर की ठोकरे खानी पड़ती, इसलिए वह अपने बच्चों को भी अपने साथ लेकर गंगा में कूद पड़ी। यह दीगर बात हैकि एक बच्चे की जान नहीं बच सकी लेकिन गोताखोर मनोज ने अपने साहस से दो जिंदगियां बचा ली।