बेशक योगी सरकार ने आलू किसानों को राहत देने के लिए कदम उठाए हैं। सरकार सब्जियों के राजा आलू की खरीद करेगी। उत्तर प्रदेश में 5 खरीद एजेंसियां खरीद के लिए तय की गई हैं। संभल जिले के लिए यूपी एग्रो को जिम्मेदारी मिली है।
जिला उद्यान विभाग अभी आदेश का इंतजार कर रहा है। मगर इतना साफ है कि आलू मूल्य 549 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ है। मूल्य को लेकर भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने तीखी प्रक्रिया दी है। उनका कहना है कि सरकार लागत में डेढ़ गुना जोड़कर फसल का मूल्य निर्धारित करने की बात कहती है जबकि आलू का जो मूल्य तय किया गया है। उससे तो लागत भी नहीं मिलेगी। किसान सरकार को आलू क्यों बेचेंगे? क्योंकि खेत से ही 549 रुपये से कहीं ज्यादा आलू बिक रहा है।
प्रति क्विंटल आलू की कीमत 700 रुपये और इससे ज्यादा मिल रही है। सरकार को किसानों को सहूलियत ही देनी है तो 1400 रुपये प्रति क्विंटल का भाव तय करती। बहरहाल, अगर किसान सरकारी केंद्रों पर आलू नहीं बेचेंगे तो खरीद का लक्ष्य कैसे पूरा होगा। यह जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों के लिए परेशानी भरा हो सकता है।
बताते चलें कि संभल जिले में पिछले सीजन में आलू की बेकदरी की तस्वीरें सामने आई थीं। किसानों को बड़ा नुकसान हुआ था क्योंकि आलू की बिक्री के बावजूद शीतगृहों का किराया चुकाना भी मुश्किल हो रहा था। तमाम किसानों ने आलू शीतगृहों में भी छोड़ दिया था। तब सड़कों कि कनारे आलू फेंक दिया गया था।