The temple of Kankali Devi located in Moulagarh is two hundred and fifty years old.
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शहर से सटे गांव मौलागढ़ में कंकाली देवी मंदिर 250 वर्ष पुराना है। मंदिर में देवी मां पिंडी स्वरूप में स्थापित हैं। 250 वर्ष पुजारी रामसुख दास को सपने में देवी मां ने दर्शन दिए थे और कहा कि पिंडी स्वरूप को राजस्थान के माउंट आबू से यहां लाकर स्थापित किया था और मंदिर बनवाया था। तभी से पुजारी के वंशज ही माता रानी की सेवा करते चले आ रहे हैं।
मौलागढ़ स्थित कंकाली देवी के मंदिर पुजारी गिरिराज किशोर गौड़ ने बताया कि उनके बाबा श्याम लाल गौड़ बताते थे कि 250 वर्ष पहले उनके पूर्वज रहे राम सुख दास माउंट आबू पहुंचे और बताए गए स्थान पर जाकर पिंडी स्वरूप देवी मां को निकाला और अपनी भूमि गांव मौलागढ़ में स्थापित कर दिया था। पहले देवी मां का मढ़िया के स्वरूप में मंदिर था। 250 वर्ष पहले जंगल हुआ करता था। उस समय मंदिर के पुजारी गाय पालते थे। वह मंदिर के पास गाय बांधकर चले जाते थे गाय की रक्षा व देखभाल देवी मां करती थीं।
उन्होंने बताया कि पहले मंदिर के पास झील हुआ करती थी। श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती गई और धीरे-धीरे मंदिर का निर्माण होता रहा। आज मंदिर विशालकाय भवन में स्थापित है। शारदीय व चैत्र नवरात्र पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मन्नत पूरी होने पर चांदी के सतिये चढ़ाते हैं श्रद्धालु
पुजारी गिरिराज किशोर गौड़ ने बताया कि शादी, नौकरी और संतान प्राप्ति आदि की मन्नतें लेकर श्रद्धालु आते हैं। मन्नत पूरी होने पर चांदी के सतिये चढ़ाते हैं। ये परंपरा वर्षों से चली आ रही है।