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Sambhal News: संभल में धीमे पड़े संस्कृत के श्लोकों के स्वर

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चंदौसी में ​स्थित श्री रघुनाथ ब्रह्मचर्य आश्रम संस्कृत महाविद्यालय - संवाद
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चंदौसी। जिले में संस्कृत शिक्षा का उजाला अब फीका पड़ता जा रहा है। श्लोकों के स्वर भी धीमे पड़ चुके हैं। कभी जिले की पहचान रहे संस्कृत के दो महाविद्यालयों और तीन इंटर कॉलेजों की दशा आज चिंता का विषय बनी है। संसाधनों की कमी और प्रशासनिक उपेक्षा के चलते दो संस्कृत इंटर कॉलेज और एक महाविद्यालय पहले ही बंद हो चुके हैं, जबकि शेष संस्थान भी अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। जर्जर भवनों और घटती छात्र संख्या के बीच, इन शिक्षण संस्थानों में वैदिक मंत्रों की गूंज अब दुर्लभ हो गई है।
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जिले में संस्कृत भाषा की शिक्षा दिन-ब-दिन सिमटती जा रही है। कभी माध्यमिक संस्कृत शिक्षा विभाग द्वारा स्थापित पांच संस्कृत विद्यालयों में ज्ञान की गंगा बहती थी, लेकिन शासन की उदासीनता और संसाधनों के अभाव ने इस परंपरा को कमजोर कर दिया है। संस्कृत अध्ययन के लिए जिले में श्री भागीरथी संस्कृत विद्यालय नगला अजमेरी, श्री शंकर संस्कृत कॉलेज मडिकवाली, श्री कल्याण संस्कृत कॉलेज दवथरा, श्री सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय चंदौसी और श्री रघुनाथ ब्रह्मचर्य आश्रम संस्कृत महाविद्यालय चंदौसी की स्थापना की गई थी। बीच में इन्हें भुला दिया गया। शासन से न तो पर्याप्त सहयोग मिला और न ही रखरखाव के लिए बजट। नतीजतन, तीन विद्यालय पूरी तरह बंद हो चुके हैं।
वर्तमान में सिर्फ श्री भागीरथी संस्कृत विद्यालय नगला अजमेरी ही संस्कृत इंटर तक की शिक्षा का संचालन कर रहा है, जहां करीब 205 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालय में तीन शिक्षक शिक्षण कार्य संभाल रहे हैं। वहीं चंदौसी का श्री रघुनाथ आश्रम महाविद्यालय में स्नातक व पर स्नातक तक की शिक्षा विद्यार्थी ग्रहण कर रहे हैं।
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इन दोनों संस्थानों की स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं है। भवन जर्जर, संसाधन सीमित और शासन की अनदेखी के कारण यहां संस्कृत शिक्षा धीरे-धीरे दम तोड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन विद्यालयों के रखरखाव और संसाधनों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो जिले से संस्कृत शिक्षा पूरी तरह समाप्त हो सकती है।
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श्री भागीरथी संस्कृत विद्यालय नगला अजमेरी के सौंदर्यीकरण का बजट प्रोजेक्ट अलंकार के तहत शासन को भेजा गया था। लेकिन अभी स्वीकृति नहीं मिल पाई है।

-सर्वेश कुमार, डीआईओएस
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