नखासा क्षेत्र के गांव मन्नीखेड़ा के जंगल में दो माह पहले इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना के जख्म अभी नहीं भर पा रहे हैं। पहले अपनों की हैवानियत और अब जिम्मेदारों की अनदेखी दो माह की हो चुकी नवजात बुलबुल झेल रही है। बुलबुल भले ही पूरी तरह स्वस्थ है, लेकिन भविष्य कहां संवरेगा, इससे अंजान है।
करीब दो माह पहले गांव मन्नीखेड़ा गांव में मनोज के खेत में सरसों की फसल के बीच नवजात बच्ची जमीन में दबी मिली थी। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर खेतों में काम कर रहे ग्रामीण मौके पर इकठ्ठा हो गए थे। आनन-फानन में बच्ची को जमीन से बाहर निकाला गया था। गांव के चौकीदार अख्तर की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और नवजात को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। तभी से वह अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती है।
लेकिन, अफसोस इसका भविष्य कहां संवरेगा, इसे लेकर जिम्मेदार उदासीन बने हुए हैं। अस्पताल प्रबंधन कई बार पत्राचार करके बुलबुल की सुरक्षित परवरिश के लिए अगली कार्रवाई करने को कह चुके हैं, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अस्पताल की डॉ. दीपशिखा ने बताया कि बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है, उसकी अच्छे से परवरिश की जा रही है।
- बच्ची अब पूरी तरह से स्वस्थ है। जिला अस्पताल में उसका समय पूरा हो गया है। आगे की परवरिश दूसरे स्थान पर है। इसके लिए वे पत्राचार कर चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। -डॉ. राजेंद्र सैनी, कार्यवाहक सीएमएस