गांव सिकंदरपुर करछली में परिषदीय विद्यालय की बिल्डिंग नहीं होने पर टीनशेड के नीचे पढ़ाई करते छा
सरायतरीन। पवांसा ब्लॉक क्षेत्र के गांव घोसीपुरा, अहमदनगर थरैसा में स्थित उच्च प्राथमिक और प्राथमिक विद्यालय की जर्जर बिल्डिंग आठ माह पहले नीलामी के बाद टूट चुकी है लेकिन अब इन्हें बनवाने की सुध नहीं ली जा रही। नतीजा पढ़ाई के लिए पंचायत सचिवालय और आंगनबाड़ी केंद्रों का सहारा है। इसके अलावा करछली में भी एक साल पहले बिल्डिंग तोड़ी गई। निर्माण के नाम पर सिर्फ पत्राचार चल रहा है। इस बीच पढ़ाई की व्यवस्था परिसर में टीन शेड लगाकर की गई है। बारिश आने पर नौनिहाल किताब और कॉपी को संभालने में रह जाते हैं। बंजरीपुर के प्राथमिक विद्यालय की बिल्डिंग भी तोड़ी गई है। इसके अलावा मिलक सैंजना में चहारदीवारी नहीं हुई। यहां लगाता ग्रामीणों का आवागमन लगा रहता है। इसके कारण पढ़ाई प्रभावित होती है। गांव बागड़पुर इम्मा में भी यही स्थिति है। ग्रामीण आवागमन स्कूल परिसर से करते हैं। लाजिमी ही पढ़ाई प्रभावित है। इस सबके बीच ब्लॉक क्षेत्र के 35 विद्यालय ऐसे हैं, जहां फर्नीचर की ही कोई व्यवस्था नहीं है। मजबूरन विद्यार्थी टाट-पट्टी और दरी बिछाकर पढ़ाई कर रहे हैं।
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एक नजर इन पर भी
गांव करीमपुर, मिलक सैंजना, शेरपुर, चपतियों की मढ़ैया, गौहत, कासमपुर जगरूप, खिरनी मोहिउद्दीनपुर, लहरशीश, विक्रमपुर तहरपुर, बसला, सिहावली, सारंगपुर, रझेरा सलेमपुर, मल्लाह मुस्तफाबाद में जो परिषदीय विद्यालय हैं, इनके मुख्य मार्ग और गेट पर कीचड़, गंदगी और जलभराव की स्थिति है। जिले में जोर-शोर से चला संचारी रोग एवं दस्तक अभियान भी इससे निजात नहीं दिला पाया। नौनिहाल स्कूल पहुंचते हैं लेकिन उन्हें इसका सामना करना पड़ता है। जिससे वह परेशान होते हैं।