मुरादाबाद। डबल फाटक पुल अब अपनी क्षमता से कहीं अधिक बोझ ढो रहा है। यह पुल लगभग चार दशक पहले वर्ष 1984 में उस समय की आबादी और परिवहन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया था। तब पुल के बाहर निवास करने वाली आबादी भी सीमित थी और वाहन भी कम थे। आवाजाही का दायरा भी अपेक्षाकृत छोटा ही था। पुल का निर्माण उस दौर के जरूरत के हिसाब से कराया गया था लेकिन अब शहर का विस्तार कई गुना बढ़ चुका है। आबादी, कॉलोनियां, व्यापारिक गतिविधियां और स्कूल-कॉलेजों की संख्या बढ़ने के साथ यहां प्रतिदिन आवागमन करने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ी है।दस सराय के बुजुर्ग दुकानदार कृष्णकांत सिंह, रूपेश भटनागर और सिद्धांत का कहना है कि इस पुल से 1984 के आसपास करीब 20 हजार लोगों का ही आना-जाना होता था। वहीं आज अनुमानित रूप से डेढ़ लाख से अधिक की आबादी इसी पुल का इस्तेमाल कर रही है। वाहनों की संख्या और भार में भी भारी वृद्धि हुई है। पहले मुख्य रूप से साइकिल और दोपहिया वाहन ही अधिक चलते थे। लेकिन अब पुल पर चार पहिया वाहन और माल ढोने वाले वाहन अधिक गुजरते हैं। मोटरसाइकिल और सार्वजनिक साधनों का भी इस्तेमाल कई गुना बढ़ गया है। संकरी जगह और लगातार बढ़ते ट्रैफिक ने पुल पर बेतहाशा दबाव बढ़ा दिया है।
इसी कारण पुल से प्रतिदिन गुजरने वाले यात्रियों और राहगीरों के लिए जाम अब एक सामान्य स्थिति बन चुकी है। सुबह स्कूल और दफ्तर के समय से लेकर शाम तक लगभग हर व्यस्त घंटे में पुल पर लंबी कतारें दिखाई देती हैं। ई-रिक्शा, ऑटो और दोपहिया वाहनों के अव्यवस्थित ओवरटेक करने की कोशिश से स्थिति और अधिक जटिल हो जाती है। लोगों को कुछ ही मिनटों के सफर में आधा घंटा या उससे भी ज्यादा समय लग जाता है।
सबसे गंभीर स्थिति तब होती है जब एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहन इस जाम में फंस जाते हैं। कई बार लोगों को खुद रास्ता बनाने की कोशिश करनी पड़ती है लेकिन पुल की संकरी चौड़ाई और सड़क के किनारों तक भरे हुए वाहनों के कारण रास्ता बनाना लगभग असंभव हो जाता है। पिछले कई वर्षों में स्थानीय निवासियों ने एक और पुल बनाए जाने की मांग की है लेकिन इस मामले में कभी भी कुछ राहत नहीं मिल पाई है।
- क्या बोले पीड़ित
- स्कूल या दफ्तरों की छुट्टी के समय पुल पर ट्रैफिक बहुत भारी हो जाता है और दोपहिया वाहन भी निकाल पाना मुश्किल हो जाता है। आधा किलोमीटर की दूरी तय करने में 30 से 35 मिनट तक लग जाते हैं। अगर दूसरा पुल बन जाए तो दबाव कम होगा और लोगों के समय की भी बचत होगी। - समरपाल, दस सराय
- जाम का असर सभी पर होता है। ट्रेन या बस पकड़नी हो या फिर अस्पताल में डॉक्टरों को दिखाने जाना हो। समय से पहले हर किसी को निकलना पड़ता है। पुल की चौड़ाई कम है और ट्रैफिक बहुत ज्यादा है। यह सिर्फ यातायात का नहीं बल्कि सार्वजनिक समस्या है। प्रशासन को इसे प्राथमिकता में लेना चाहिए। - मो. आसिफ, करुला