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Sambhal News: दीपक बन जो तम को हरता, वह होता शिक्षक...

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बहजोई(संभल)। सृजन साहित्यिक अभिरुचि मंच की ओर से शिक्षक दिवस को लेकर काव्य गोष्ठी की गई। इसमें कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को आकर्षित किया।काव्य गोष्ठी की शुरूआत रामपुर से आए कवि सत्यवीर सिंह उजाला ने वाणी वंदना से की। उन्होंने सुनाया- अंत स्थल में बसा प्रेम को कर सेवा सत्कार। दीन जनों में ईश बसे हैं, वही उतारें पार। पंवासा के कवि ज्ञान प्रकाश उपाध्याय ने सुनाया, शिक्षक हैं भारत निर्माता, शिक्षक सबके भाग्यविधाता। मिलकर आओ शीश नवाएं, सत्य मार्ग के हैं उद्गाता। वरिष्ठ कवि रूप किशोर गुप्ता ने सुनाया, इस देश की माटी से जिसे प्यार नहीं है, रहने का उसे देश में अधिकार नहीं है। दीपक गोस्वामी चिराग ने सुनाया, दीपक बन जो तम को हरता, वह होता शिक्षक। चुन-चुन गुण शिष्यों में भरता, वह होता शिक्षक। बदायूं से आए अरशद रसूल ने सुनाया, आइना ही खराब होता है, झूठ जब बेनकाब होता है। ताज भी देर तक नहीं रहते, जुल्म का जब हिसाब होता है। कवि संभव जैन ने सुनाया, मौन को स्वर नहीं बना पाए, स्वर को अक्षर नहीं बना पाए। द्वार, आंगन, छतें बना लीं, बस लोग घर नहीं बना पाए। वहीं, कवि अवधेश विद्यार्थी ने, खुदा ने तुमको चांद सी सूरत, गुलाबों-सी खुशबू दी है। चंदौसी की युवा कवयित्री मनीषा गौतम ने, काम करते निकल न जाए ये उम्र कहीं, कि अभी तो कुछ किया ही नहीं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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चंदौसी के कवि वेंकट कुमार ने याद आती रहीं फिर वही बीती हुई बातें, सूखी फसलों पर पड़ीं वो बेवक्त की बरसातें सुनाकर श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। इस बीच कवि राजेश तन्हा समेत डॉ. सुनीता शंखवार, डॉ. संदीप सचेत, राममूर्ति नाथ, अनुराधा गोस्वामी, वीरेंद्र गोस्वामी, वंश, विमला देवी व वंशिका आदि रहे।
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