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बंद मीरमपुर भूमि प्रकरण के आरोपी कर्मियों के नाम नहीं हुए उजागर

सार

तहसील क्षेत्र के गांव बंद मीरमपुर भूमि प्रकरण मामले में दोषी राजस्व विभाग के कर्मियों के खिलाफ तहसील प्रशासन की कार्रवाई अधर में लटकी है।तहसीलदार की संस्तुति पर एसडीएम रामकेश धामा ने मामले में जांच टीम गठित कर दी थी।इसके बाद से उक्त प्रकरण में कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
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विस्तार
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तहसील क्षेत्र के गांव बंद मीरमपुर भूमि प्रकरण मामले में दोषी राजस्व विभाग के कर्मियों के खिलाफ तहसील प्रशासन की कार्रवाई अधर में लटकी है। कार्रवाई सिर्फ जांच रिपोर्ट में सिमट कर रह गई। अभी तक तहसील प्रशासन तत्कालीन आरोपी लेखपाल और कानूनगो का नाम उजागर नहीं कर पाया है।
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बंद मीरमपुर गांव में 145 हेक्टेयर (2345 बीघा) सरकारी भूमि है। जिसे तहसील कर्मचारियों ने वर्ष 2012 में बिना किसी आदेश के ऑनलाइन खतौनी फीड करते समय भूमि की श्रेणी 10(ग) एनजेडए (नॉन जमींदारी इबोलिशन) से बदलकर श्रेणी 1(क) जेडए (जमींदारी इबोलिशन) में कर दिया और 170 किसानों को अवैध रूप से उसका मालिक बना दिया था। जुलाई माह में तहसीलदार देवेंद्रमणि त्रिपाठी की जांच के दौरान पूरा प्रकरण संज्ञान में आया था। तहसीलदार की संस्तुति पर एसडीएम रामकेश धामा ने मामले में जांच टीम गठित कर दी थी। जांच में प्रथम दृष्टया तत्कालीन लेखपाल, रजिस्ट्रार कानूनगो और कंप्यूटर ऑपरेट की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी।
20 अगस्त को तहसीलदार ने एसडीएम के समक्ष जांच पूर्ण कर रिपोर्ट प्रस्तुत की। साथ ही जांच रिपोर्ट भूलेख परिषद के प्रेषित कर उक्त खतौनी को भूलेख पोर्टल से हटाने के संस्तुति की गई। इसके बाद से उक्त प्रकरण में कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
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बंद मीरमपुर भूमि प्रकरण में तत्कालीन लेखपाल, रजिस्ट्रार कानूनगो और कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। अभी उनके नाम उजागर नहीं हुए हैं। राजस्व कार्यालय को पत्र जारी कर उक्त कर्मियों के नाम प्रकाश में लाने को कहा गया है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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रामकेश धामा, एसडीएम, गुन्नौर
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