संभल को पर्यटन नगरी घोषित किए जाने की कवायद शुरू हो गई है। इसकी लंबे समय से मांग उठ रही थी। जिले के तीर्थ व कुएं संवारे जाएंगे। पालिका के ईओ ने बताया कि कूप व तीर्थ को प्राचीन रूप में विकसित किया जाएगा। कुएं जाल से कवर किए जाएंगे। साथ ही उनकी पहचान लगाई जाएगी। यह पहल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए की जा रही है। इसके लिए संभल कल्कि देव तीर्थ समिति का भी गठन किया गया है। इस समिति की अध्यक्षता डीएम द्वारा की जा रही है।
संभल महत्म्य के अनुसार नगर और उसके आसपास 68 तीर्थ, 19 कूप हैं। इसमें पांच तीर्थ प्रमुख हैं। त्रिकोणीय आकार में संभल बसा है। इसके तीनों कोने पर महादेव के मंदिर हैं। धार्मिक और ऐतिहासिक नगर होने के नाते संभल को पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किया जाना है। डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि 41 तीर्थ को चिह्नित कर लिए गए है। 19 कूप मिल गए हैं। जैसा संभल महत्म्य में उल्लेख है उसी दिशा के अनुसार यह तीर्थ और कूप मिले हैं, जो तीर्थ बाकी हैं उनको भी तलाश किया जा रहा है। इससे सभी 68 तीर्थ को संवारा जाए।
डीएम ने बताया कि जो तीर्थ या कूप हैं उनके नक्शे मुख्य मार्गों पर लगाए जाएंगे। जिससे पर्यटक सीधे उन स्थानों पर पहुंच जाएं जहां वह जाना चाहते हैं। बताया कि जो नगर पालिका के क्षेत्र में तीर्थ और कूप आते हैं उनको संवारने की जिम्मेदारी पालिका की रहेगी, जो देहात क्षेत्र में हैं उनको संवारने का काम ग्राम पंचायत और मनरेगा को करना होगा।
पुराणों के अनुसार, कलियुग में भगवान कल्कि का अवतरण संभल में होगा
संभल ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व से भरा शहर है। जितना महत्व ऐतिहासिक तौर पर राजपूत और मुगलों से जोड़कर दिया जाता है। उससे कहीं ज्यादा महत्व धार्मिक नजरिए से दिया जाता है। स्कंद पुराण में उल्लेख है कि कलियुग में भगवान कल्कि संभल में अवतरित होंगे। इसी मान्यता को जोड़कर संभल को देखा जाता है। वंशगोपाल तीर्थ में भगवान कृष्ण एक रात ठहरे थे और कदम्ब के वृक्ष के नीचे विश्राम किया था। इन सभी मान्यता को जोड़ने से महत्व ज्यादा बढ़ जाता है। संभल महत्म्य में सभी तीर्थ और कूप की एक दूसरे से दिशा और दूरी दर्ज है। गंगा से दूरी और भगवान कल्कि का अवतरण होने वाले स्थान के बारे में भी उल्लेख किया गया है।
प्राचीन स्थलों के बोर्ड लगाए जाएं, कुएं सुरक्षा के लिहाज से तैयार होंगे
नगर पालिका द्वारा सभी प्राचीन स्थलों पर बोर्ड लगाए जाएंगे। मणिभूषण तिवारी ने बताया कि तीर्थ और कूप प्राचीन हैं। कुएं सुरक्षा के लिहाज से तैयार किए जाएंगे। बताया कि अभी 20 कुएं भी मिल चुके हैं। इसमें 10 से ज्यादा कुएं की खोदाई कराई जा चुकी है, जो कुएंं बाकी हैं। उनकी खोदाई शुरू कराई जाएगी।
एएसआई इन तीर्थों का कर चुका है सर्वे
चतुर्मुख ब्रहम कूप स्थित पानी की टंकी के पास, ग्राम आलम सराय, संभल।
अमृत कूप स्थित कूप मंदिर, दुर्गा कालोनी, संभल।
अशोक कूप स्थित मोहल्ला हल्लू सराय, संभल।
सप्तसागर कूप स्थित सर्थलेश्वर मंदिर, सरथल चौकी के पास, मोहल्ला कोट पूर्वी, संभल।
बलि कूप स्थित पुरानी तहसील के पास, कूचे वाली गली, संभल।
धर्म कूप स्थित हयातनगर, संभल।
ऋषिकेश कूप स्थित शिव मंदिर, मोहल्ला कोट पूर्वी, संभल।
परासर कूप स्थित कल्कि मंदिर के पास, मोहल्ला कोट पूर्वी, संभल।
अकर्ममोचन कूप स्थित संभल कोतवाली के सामने, मोहल्ला ठेर संभल।
धरणि बाराह कूप स्थित जामा मस्जिद चौकी के नीचे, मोहल्ला कोट गर्वी, संभल।
भद्रका आश्रम तीर्थ, होज भदेसरा, संभल।
स्वर्गदीप तीर्थ/सती मठ, स्थित गांव जलालपुर मोहम्मदाबाद, संभल।
चक्रपाणि तीर्थ, गांव जलालपुर मोहम्मदाबाद, संभल।
प्राचीन कूप स्थित एक रात वाली मस्जिद के पास, मोहल्ला कोट गर्वी, संभल।
प्राचीन कूप स्थित जामा मस्जिद परिसर, मोहल्ला कोट गर्वी, संभल।
प्राचीन कूप स्थित बाल विद्या मंदिर के सामने, मोहल्ला चमन सराय, संभल।
प्राचीन कूप स्थित न्यारियों वाली मस्जिद, मोहल्ला खग्गू सराय, संभल।
प्राचीन कूप स्थित गद्दियों वाला मोहल्ला, कोट पूर्वी, संभल।
प्राचीन कूप स्थित सेठों वाली गली, मोहल्ला कोट पूर्वी, संभल।
प्राचीन कूप स्थित एजेंटी चौराहे के पास, मोहल्ला डूंगर सराय, संभल।
प्राचीन मंदिर व कूप स्थित मोहल्ला खग्गू सराय, संभल।
प्राचीन तीर्थ / शमशान / मंदिर, आर्य कोल्ड स्टोर के पास, अजीजपुर असदपुर, संभल