संभल। केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी परियोजना जल जीवन मिशन संभल जिले में लोगों के जी का जंजाल बन गई है। इस परियोजना के अंतर्गत तमाम काम अधूरे पड़े हैं। यह परियोजना 2021 में शुरू हुई थी। पहले चरण में 256 करोड़ रुपये से 104 ग्राम पंचायतों में काम कराए गए थे। बाद में बजट का अभाव हो गया। जिसके चलते काम की सुस्ती बढ़ गई। अब बजट का इंतजार है। इसके बाद ही काम में रफ्तार आएगी।
दरअसल विभाग का दावा है कि 28 अगस्त 2025 तक जिले के तीन लाख से अधिक घरों तक पेयजल नल कनेक्शन की आपूर्ति की जा रही है। घरों में नल कनेक्शन लगाने का काम भी 92 फीसदी पूरा हो गया। बाकी काम को बजट मिलने के बाद ही रफ्तार दी जाएगी।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दो करोड़ रुपये ग्राम पंचायत में खर्च किए जाने हैं। यदि आबादी ज्यादा है तो पांच करोड़ तक खर्च किए जा सकते हैं। इसको देखते हुए ही बजट की मांग की गई है। जिले के सिंहपुरसानी, असमोली, सुनवारी, लखौरी जलालपुर, शफातनगर समेत कई क्षेत्रों में आर्सेनिक, आयरन और फ्लोराइड की मात्रा पानी में बढ़ने से लोगों को तमाम तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इन गांवों में परियोजना का कार्य अधूरा पड़ा है।
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जिले की 300 ग्राम पंचायतों में ओवरहेड टैंक का निर्माण और पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया
पहले चरण में जिले की तीन सौ ग्राम पंचायतों में ओवरहेड टैंक का निर्माण और पाइपलाइन बिछाकर जलापूर्ति का काम कराया गया। इन गांवों में यह दोनों काम हो गए लेकिन टेस्टिंग ज्यादातर गांवों में नहीं हो सकी है। इसके चलते खोदी गई सड़कों से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है और पानी की भी आपूर्ति नहीं मिली है।
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बिजली हो या न हो, सौर ऊर्जा से चलेगा नलकूप
बिजली न होने पर भी नलकूप चलेगा। क्योंकि यह सौर ऊर्जा आधारित होगा। बिजली की समस्या से निपटने के लिए सौर ऊर्जा आधारित नलकूप लगाए जा रहे हैं। अधिशासी अभियंता का कहना है कि बिजली हो या न हो, इसका कोई फर्क नहीं पड़ेगा। क्योंकि नलकूप सौर ऊर्जा से चलेगा और पानी ओवरहेड टैंक में स्टोर होता रहेगा। जिसकी समय-समय पर लोगों को आपूर्ति होगी।
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जल जीवन मिशन के तहत कार्य जिले में लगातार हो रहा है। इस समय बजट का अभाव है। इसलिए कार्य धीमे हो रहा है। वर्ष 2028 तक परियोजना का पूरा करना है। बजट मिलने पर काम में तेजी लाई जाएगी।
चंद्रहा्स, एक्सईएन, जलनिगम, संभल