गैलुआ गांव में कीचड़ के बीच से शव यात्रा निकालते लोग। संवाद
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सिंहपुरसानी (संभल)। अंतिम यात्रा... वो पल है, जब हर परिवार चाहता है कि अपनों को सम्मान के साथ दुनिया से विदा किया जाए, लेकिन अगर वही अंतिम सफर गंदे पानी, कीचड़ और सड़ी बदबू के बीच से गुजरे तो इंसानियत तो छोड़िए श्रद्धा भी शर्मसार हो जाती है। रविवार को गांव गैलुआ में ऐसा ही देखने के लिए मिला। गांव निवासी विकुल की हादसे में मौत के बाद अंतिम शवयात्रा कीचड़ और गंदे पानी से निकाली गई।
संभल ब्लॉक क्षेत्र के गांव गैलुआ विकुल की शनिवार की रात सड़क हादसे में मौत हो गई। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचा तो परिजनों व ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी, लेकिन गांव के मुख्य मार्ग पर कीचड़ और गंदा पानी भरा होने की वजह से परिजन काफी समय तक सोचते रहे कि शव यात्रा कैसे निकाली जाए। श्मशान घाट तक जाने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं दिखा तो परिजन और ग्रामीण नंगे पैर कीचड़ और गंदे पानी के बीच से ही शव यात्रा निकालने के लिए मजबूर होने पड़ा। इससे लोगों आक्रोश है।
ग्राम प्रधान पर लगाए आरोप
गांव के निवासी रविराज चाहल ने बताया कि कई माह पूर्व ग्राम प्रधान ने खड़ंजा उखड़वाने के बाद सीसी टाइल्स बिछाने का काम शुरू किया था। मानक के अनुरूप काम न होने पर ग्रामीणों ने विरोध किया तो प्रधान ने रंजिश मानते हुए रास्ते को अधूरा ही छोड़ दिया। शवयात्रा को कीचड़ से गुजरना पड़ा, यह बेहद शर्मनाक है। ग्रामीण पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि कई बार रास्ते की शिकायत उच्च अधिकारियों से भी की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पंकज ने कहा कि ग्राम प्रधान की मनमानी के कारण गांव में शव यात्रा को कीचड़ से निकलना पड़ा। अर्थी को लेकर कई बार फिसल गए लेकिन जैसे तैसे गंदे रास्ते से निकल कर आए।