संभल। संभल जिले में निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे पर दिल्ली की फर्म ने 31.40 लाख रुपये की मिट्टी डाली थी। आरोप है कि कार्यदायी संस्था इन रुपयों का भुगतान नहीं दे रही है। इससे फर्म डिफॉल्टर होने के कगार पर है। फर्म के प्रतिनिधि ने इस बाबत जिला प्रशासन के अधिकारियों को शिकायतीपत्र दिया है। इसमें रुपये दिलवाने की मांग की गई है। फर्म के मालिक राकेश चौधरी ने बताया कि उनकी फर्म ने संभल तहसील क्षेत्र के गांव खिरनी मोहिउद्दीनपुर में निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे पर किसानों के खेतों से मिट्टी खरीदकर डाली थी। मिट्टी डालने के बाद अप्रैल और मई महीने का भुगतान नहीं किया गया है। कार्यदायी संस्था पर 31.40 लाख रुपये बकाया है। भुगतान नहीं होने से किसान और मजदूर परेशान हैं। फर्म की जीएसटी भी जमा नहीं हो पा रही है। अधिकारियों से रुपये दिलाए जाने की मांग की गई है।
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अवैध खनन में सरकार का भी आठ लाख रुपये बकाया
गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य करा रही कार्यदायी संस्था की ओर से 2023 में परमिशन की आड़ में अवैध खनन किया गया था। बसला गांव के रकबे में खनन हुआ। हालांकि, परमिशन की बात सामने आई लेकिन परमिशन दूसरे स्थान की थी। इसी की आड़ में अवैध खनन किया गया। जांच पड़ताल के बाद स्पष्ट हुआ कि कुल छह किसानों के खेत से 28 हजार 335 घन मीटर अवैध खनन कराया गया। प्रशासन को इस मामले की जानकारी तब हुई थी, जब औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि चिह्नित करने राजस्व टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद प्रशासन ने जुर्माने की धनराशि आठ लाख रुपये तय की और वसूली के लिए नोटिस भेजा। लेकिन यह धनराशि अभी तक जमा नहीं हो सकी है। सूत्रों का कहना है कि जिला स्तरीय अधिकारी ही इसे ठंडे बस्ते में डाले हुए हैं, जिस कारण राजस्व की वसूली नहीं हो रही है।