चंदौसी(संभल)। बिजली विभाग की कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले के सबसे बड़े विभागीय अधिकारी कार्यालय के मुख्य द्वार पर ही खड़े बिजली के खंभे नीचे से पूरी तरह गल जाने के कारण सड़क की ओर झुक गए हैं। यही नहीं कई खंभों को तो पेड़ पौधों ने पूरी तरह से ढक लिए हैं, इससे करंट उतरने का खतरा बना रहता है। रोज यह सब देखने के बाद भी अधिकारी नजरंदाज किए हुए हैं।
शहर में बदायूं-मुरादाबाद रोड पर रेलवे के ट्रेनिंग कालेज के सामने बिजली विभाग का मुख्य कार्यालय है। यहां अधीक्षण अभियंता व अधिशासी अभियंता से लेकर अन्य कई विभागीय अधिकारियों के कार्यालय हैं। इन सभी कार्यालयों का मुख्य द्वार भी ट्रेनिंग कालेज के सामने ही है। जिस मुख्य द्वार से अफसर अपने कार्यालय में जाते हैं। उसी के दोनों ओर लगे बिजली के खंभों पर पेड़ पौधों की लताएं फैली हुई हैं। इन पोलों को हरियाली ने पूरी तरह से ढक लिया है। सड़क के दूसरी ओर एक खंभा पूरी तरह से नीचे से गल चुका है। यह सड़क की ओर झुका हुआ है। इसे बदलने के बजाय किसी तरह से रोके रखने का प्रयास किया गया। इधर से प्रतिदिन हजारों की संख्या में बड़े छोटे वाहन निकलते हैं, जिससे हर पल खतरा बना रहता है। इसी के साथ खंभों से लिपटे हरे पेड़ों में भी करंट उतरने का खतरा बना रहता है।
अहम बात यह है कि कार्यालय में आते-जाते अधिकारी हर दिन खंभाें की स्थिति देखते हैं, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया है। अनदेखी का यही क्रम रहा तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। पता हो कि जिले भर में जर्जर पोल व तार बदलने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई रिवेम योजना के तहत जिले को लगभग साढ़े चार सौ करोड़ रुपये की धनराशि मिली थी। इस सबके बाद भी बिजली विभाग अपने कार्यालय के सामने ही समस्या बने जर्जर पोल नहीं बदलवा सका। लोगों का कहना है कि शायद विभाग के अफसरों को किसी का इंतजार है।
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पिछले दिनों रिवेज योजना के तहत झूलते तार व गले खंभे ठीक कराए गए थे, साथ ही खंभों पर झुकी पेड़ों की टहनियों को भी कटवाया गया था। कुछ रह गए हैं तो उन्हें भी सही करा दिया जाएगा।
विकास भटनागर, अधीक्षण अभियंता।