बनियाठेर के गांव अकरौली में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते कथा वाचक अशोक दीक्षित- संवाद
बनियाठेर। गांव अकरौली में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन सोमवार को कथा व्यास अशोक दीक्षित ने भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान की अनेकों लीलाओं में रासलीला श्रेष्ठतम है। यह ईश्वर और जीव के मिलन की अनुभूति कराने वाली कथा है, जिसे काम को बढ़ाने की नहीं, बल्कि काम पर विजय प्राप्त करने की लीला कहा गया है।
कथा के दौरान श्रद्धालु श्रीकृष्ण भक्ति में लीन नजर आए। कथा व्यास अशोक दीक्षित ने बताया कि रासलीला में कामदेव ने खुले मैदान में संपूर्ण सामर्थ्य के साथ भगवान पर आक्रमण किया, परंतु वह भगवान को पराजित नहीं कर सके और स्वयं परास्त हो गए। उन्होंने कहा कि रास लीला का भाव समझना चाहिए। इस लीला को काम दृष्टि से देखना या इसमें शंका करना भी पाप माना गया है।
कथा वाचक ने बताया कि श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मिणी साथ संपन्न हुआ था। रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा हैं और लक्ष्मी कभी नारायण से दूर नहीं रह सकती। कथा के समापन पर आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर डॉ. विनोद शर्मा, हरकिशोर रुहेला, हरिकृष्ण शर्मा, महीपाल सिंह मौर्य, महेंद्र मौर्य, पीयूष त्रिवेदी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। संवाद