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Sambhal News: बेटियों में जज्बा है पर जिले में नहीं है क्रिकेट की जमीन

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संभल। महिला क्रिकेट टीम ने विश्वकप जीतकर इतिहास रच दिया है। देश को बेटियां पर गर्व है और जगह-जगह इस जीत का जश्न भी खूब मनाया गया है। शहरों के साथ गांव और छोटे कस्बों की बेटियाें के मन भी क्रिकेट खेलने का जज्बा है लेकिन संसाधन ही नहीं मिल रहे। यह जज्बा बस जज्बा ही बनकर रह जा रहा है। शहरी क्षेत्र में बेटियों के हौसले बुलंद हैं लेकिन संसाधन स्कूल तक सीमित हैं। जिले में एक भी स्टेडियम नहीं हैं जहां बेटियां तैयारी कर सकें।
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बहजोई के गांव भरतरा में जिला स्टेडियम का निर्माण अधूरा है। कार्यदायी संस्था सुस्ती दिखाकर कार्य कर रही है। शासन की ओर से जो राशि प्रथम फेस के निर्माण के लिए दी गई है उसको ही खर्च नहीं किया गया है। दूसरे फेस के लिए राशि तो जारी कराने के लिए प्रयास ही क्या होने हैं। जबकि इस जिला स्टेडियम के निर्माण पूरा होने की अवधि मार्च 2026 तय की गई है। इसके बाद भी कार्यदायी संस्था सुस्ती से कार्य कर रही है।
जिला स्टेडियम गांव भरतरा में 4.318 हेक्टेयर भूमि में निर्माण हो रहा है। शासन ने 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। प्रथम फेस के तहत शासन ने कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) को पांच करोड़ रुपये की किस्त भी जारी कर दी है। इस स्टेडियम में करीब 18 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे लेकिन अभी पांच करोड़ रुपये का भी कार्य नहीं किया गया है। ऐसे में प्रतिभाएं क्या निखरेंगी। बेटे तो दूसरे जिले में जाकर अपनी तैयारी कर रहे हैं लेकिन बेटियों के लिए दूसरे जिले में पहुंचकर क्रिकेट की तैयारी करना चुनौती से भरा है।
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जिला स्टेडियम में यह होना है निर्माण
जिला स्टेडियम में बहुद्देशीय हॉल का निर्माण चल रहा है। बाउंड्रीवॉल, पवेलियन, नलकूप आदि का काम होना बाकी है। जबकि इस स्टेडियम के लिए प्रयास 2013 से चल रहे हैं। जिला स्टेडियम की घोषणा हुई थी तो युवाओं को लगा था कि वह अपनी प्रतिभा को अब निखार पाएंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं।



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क्या बोली बेटियां

क्रिकेट में कैरियर बनाना बेटियों के लिए चुनौती है। संसाधन कोई नहीं है। दूसरे जिले में जाकर तैयारी करना मुश्किल से भरा है। जिले में स्टेडियम होता तो तैयारी करने में आसानी होती।
रानिया, क्रिकेट खिलाड़ी, संभल
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जिले में स्टेडियम होने से काफी सहूलियत होती लेकिन अभी तक जिले में स्टेडियम ही नहीं है। स्कूल में ही तैयारी की गई है। जो काफी नहीं है। स्टेडियम और अच्छे कोच के बिना खेल में निखार नहीं आ सकता है। बेटियों के लिए यह बड़ी चुनौती है।
सानिया, क्रिकेट खिलाड़ी, संभल

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देश के लिए खेलने का इरादा है। अक्तूबर में कानपुर में प्रदेश स्तरीय बालिका क्रिकेट प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिला था। जिले में तैयारी के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। जिला स्टेडियम का निर्माण हो गया होता तो तैयारी करने में मदद मिलती।
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प्रतीक्षा, क्रिकेट खिलाड़ी,चंदौसी
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