जो दावेदार अपने कार्यालय पर बुलाकर करा रहे थे लोगों काे नाश्ता-चाय, वह मायूस दिखे
संभल। आरक्षण बदलते ही दावेदारों का मिजाज भी बदल गया। जो दावेदार बुधवार तक लोगों के चाय-नाश्ता कराने में जुुुटे वह बृहस्पतिवार को मायूस दिखे और चाय-नाश्ते का दौर थमा सा दिखाई दिया। लोगों की भीड़ तो काफी जुटी लेकिन दावेदार ज्यादा तवज्जो नहीं दे सके। दावेदारों को आरक्षण में ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं थी। अब जिले में छह निकायों पर आरक्षण में बदलाव हुआ है। इसका असर दावेदारों के कार्यालयों पर साफ दिखाई दिया। बताया जा रहा है कि कई दावेदार ऐसे हैं जो लाखों रुपये खर्च कर चुके हैं। पोस्टर, बैनर और फ्लैक्स के लगवाने के साथ ही महीनों से लोगों की खातिर तवाजो करने में लगे थे। अब आरक्षण के बदलाव से पूरा सियासी समीकरण ही बदल दिया। जो खर्च किया गया है उसको बेवजह माना जा रहा है। लोगों में भी तरह तरह की चर्चा है। जो दावेदारों के पक्के समर्थक थे वह भी मायूस हैं।
गली मोहल्ले में बने कार्यालयों पर लगे ताले
आरक्षण बदलाव के दिन ही कई दावेदारों के गली मोहल्ले में बनाए गए कार्यालयों पर ताला लग गया। जहां हर रात लोगों की भीड़ जुटती थी वहां सन्नाटा दिखाई दिया। जो प्रमुख कार्यकर्ता हैं वह दावेदार के घर या कार्यालय पर ही पहुंच गए। इन कार्यालयों के बंद होने पर भी लोगों के बीच चर्चा खूब हो रही है। दावेदार भी रात के समय शहर में घूमकर लोगों से मुलाकात कर रहे थे। अब वह भी थम गई है।