एक डिग्री कॉलेज की महिला असिस्टेंट प्रोफेसर की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों में फंसे प्राचार्य व एक प्रोफेसर पर लगाए गए। इस मामले में पुलिस ने आरोपों को गलत बताया है। जिस पर प्रोफेसर ने अपना निलंबन वापस लिए जाने मांग कर दी। इस पर महाविद्यालय के सचिव शांतनु ने प्रोफेसर को संबोधित पत्र भेजा है।
जिसमें सचिव का कहना है कि उन्हें प्रोफेसर द्वारा निलंबन वापस लिए जाने की मांग का पत्र प्राप्त हुआ। जिसमें प्रोफेसर ने ने अपने और प्राचार्य का निलंबन वापस लिए जाने की मांंग की है। जो निलंबन आदेश पारित किया गया है। उसमें एफआईआर का कोई उल्लेख नहीं है। बल्कि प्राचार्य और प्रोफेसर के विरुद्ध महाविद्यालय में संचालित वोकेशनल कोर्सेस में भ्रष्टाचार, परीक्षा ड्यूटी में अनियमितता, उत्तर पुस्तिकाओं का बिना मूल्यांकन किए विश्वविद्यालय की साइट पर अंक अपलोड किए जाने तथा महाविद्यालय के स्टाफ के अवकाश प्रार्थनापत्रों को छिपा कर अनुपस्थिति दर्ज करा कर मानसिक उत्पीड़न करने आदि के आरोप परिलक्षित हैं। वोकेशनल कोर्सेस के विषम सेमेस्टर की प्रयोगात्मक परीक्षा को विश्वविद्यालय द्वारा निरस्त किया जा चुका है। पर्यवेक्षक के निर्देशानुसार प्रयोगात्मक परीक्षा कराई जा रही है। जांच अधिकारी को इन मामले में सहयोग करने की बात कही है। साथ ही तीन दिन के अंदर आदेशों का पालन न करने पर विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी है।