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Sambhal News: सैयद फिरोजशाह के किले का होगा कायाकल्प

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संभल। फिरोजपुर स्थित किले पर संरक्षित स्मारक का बोर्ड लगाने के बाद पुरातत्व विभाग भूल गया था लेकिन, विभाग की ओर से अब उसी किले को सुरक्षित और संरक्षित की कार्ययोजना पर अमल शुरू हुआ है। साफ-सफाई शुरू कराई गई है। इससे पहले वर्ष-2017 में किले की मरम्मत और चहारदीवारी पर 1.40 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।बताया जाता है कि जिले के फिरोजपुर गांव में 1643 ई. में मुगल बादशाह शाहजहां के सेनापति सैयद फिरोज शाह यहां आकर बसे थे। आगरा में दुश्मनों की घेराबंदी किए जाने के बाद सैयद फिरोज खां ने फिरोजपुर में अपने ठहरने के लिए खुशनुमा किले का निर्माण कराया था इसलिए सैयद फिरोज शाह के ही नाम से इस गांव का नाम फिरोजपुर रखा गया। किले के भीतर भूमि पर एक बुर्ज और कुआं बना है। निकट ही मस्जिद है। किले और मस्जिद दोनों पुरातत्व विभाग से संरक्षित हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि देखरेख न होने की वजह से किले की हालत जर्जर बनी हुई थी। हालांकि, वर्ष-2017 में पुरातत्व विभाग ने इसकी हालत पर गौर किया और किले की बाउंड्रीवॉल कराई। जिस पर करीब 1.40 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। चूंकि अब सौंधन के किले को संवारा जा रहा है, तो प्रशासन का ध्यान फिरोजपुर के किले पर भी गया है। इसी क्रम में किले के आसपास साफ-सफाई शुरू कराई गई है। दो दिन से साफ-सफाई चल रही है। इस कार्य में लगे मजदूरों का कहना था कि इसे संवारने के लिए साफ-सफाई करने का जिम्मा उन्हें सौंपा गया है। इसके बाद जल्द किला नया रूप में देखने को मिलेगा।
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जर्जर हालत होने से आए दिन गिरतीं हैं किले के द्वार की ईंटें
फिरोजपुर के प्राचीन किले की लंबे समय से जर्जर हालत है। किले के द्वार की ईंटें गिरती रहती हैं लेकिन किसी भी व्यक्ति या बच्चे महिला के चोट नहीं लगी। किले के आस पास रहने वाले लोग दिन भर किले के द्वार के नीचे से होकर गुजरते रहते हैं।
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इस ऐतिहासिक किले का निर्माण सैयद फिरोज शाह ने कराया था लेकिन कई वर्ष से किले की हालत जर्जर बनी हुई है। वर्ष-2017 में पुरातत्व विभाग ने किले के चारों ओर बाउंड्री कराई। अब किले को पुराने स्वरूप में लाने की कवायद हो रही है। इससे उम्मीद है जल्द किले की हालत सुधरेगी।

-मौलाना शरीफ आलम, मस्जिद के इमाम
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रोशन चौकी के पास था नौबतखाना
गांव फिरोजपुर के निवासी शेख साबिर हुसैन (100 वर्ष) बताते हैं कि उनके पूर्वज काले बख्श, ख्वाज बख्श, अली बख्श आदि फिरोज शाह के किले में रोशन चौकी पर नौबतखाना के दौरान नफीरी व नक्कारा बजाते थे, उनके पास इसकी सनद (पत्र) भी है। किले की सुरक्षा और संरक्षण की अब व्यवस्था की जा रही है, तो बेहद खुशी की बात है। वह बताते हैं कि सैयद फिरोज शाह ने 1643 में किले का निर्माण कराया था। उन्हीं के नाम पर हमारे गांव का नाम फिरोजपुर रखा गया।
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जिले में धरोहरों को सुरक्षित रखने की कवायद के क्रम में फिरोजपुर किले को संवारा जाएगा। पहले से किले की चहारदीवारी हो चुकी है। अब कायाकल्प कराने की योजना है। इसके अलावा और भी कार्य होंगे।
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-डॉ.राजेंद्र पैंसिया, डीएम, संभल
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