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Sambhal News: स्टेडियम न होने से दम तोड़ रहीं खेल प्रतिभाएं

Thu, 28 Mar 2024 05:36 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
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संभल। जिले के अधिकांश खिलाड़ी राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। लेकिन जिले में स्टेडियम न होने से खेल प्रतिभाएं दबकर रह गई हैं। स्टेडियम के अभाव में खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पा रहा है। जिले में कोई ऐसा खुला मैदान नहीं है, जहां पर खिलाड़ी सुबह-शाम अभ्यास कर अपनी प्रतिभा को निखार सके।
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जनपद में जिला स्टेडियम के लिए प्रस्ताव तो बना, लेकिन सिर्फ कागजों में सिमटने के सिवाय तरातल पर नहीं उतरा। दरअसल बहजोई के गांव भरतरा में जिला स्टेडियम के लिए 4.318 हेक्टेयर भूमि चिह्नित करने के बाद 18 करोड़ रुपये में निर्माण के लिए मंजूरी मिल चुकी है। शासन से पांच करोड़ रुपये की पहले किश्त भी जारी हो गई है। लेकिन विभागीय अधिकारियों की सुस्त रवैये के चलते टेंडर प्रक्रिया नहीं हो सकी। जिसके चलते निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। अब आचार संहिता हटने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया हो सकेगी। उसके बाद ही स्टेडियम का निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा। यदि विभागीय अधिकारी सुस्त न होते तो अब तक स्टेडियम का निर्माण कार्य शुरू हो चुका होता।

पहली किश्त से होंगे यह कार्य
जिला स्टेडियम के निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) को नामित किया है। यह कार्यदायी संस्था शुरूआती काम में बाउंड्रीवाॅल, पवेलियन, नलकूप का काम करेगी। इसके बाद दूसरी किश्त में अन्य काम किए जाएंगे।
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क्या बोले युवा
कोट
जिले में खेलकूद और दौड़ के लिए कोई ऐसा मैदान नहीं है, जहां पर अभ्यास कर सकें। जिला स्टेडियम बनना तो दूर अभी तक निर्माण कार्य भी शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में युवा पुलिस और आर्मी की भर्ती की तैयारी अच्छे से नहीं कर पा रहे हैं। - राजकुमार यादव, गांव अतरासी
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कोट
खेल का मैदान न होने से जिले के प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। क्रिकेट ज्यादातर युवाओं की पसंद है लेकिन मैदान नहीं है। ऐसे में तैयारी कैसे की जाए। अभ्यास के लिए जिले में कोई भी मैदान नहीं है। यह बड़ी समस्या है। खासतौर से लड़कियां ज्यादा परेशान हैं। -काजल, गांव बसला
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कोट
फोर्स में नौकरी की तैयारी के लिए तमाम युवा निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेव-वे पर दौड़ लगाने जाते हैं। रोड पर दौड़ लगाते समय कई युवा हादसे का शिकार हो चुके हैं। ऐसे में से हादसे का डर रहता है। इसलिए बेहतर तैयारी के लिए मैदान चाहिए। -पुष्पेंद्र यादव, गांव किसौली
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कोट
छोटे मैदान पर न दौड़ लगती है और न अन्य कोई तैयारी होती है। कच्चे मार्गों पर दौड़ना पड़ता है। जब भर्ती में दौड़ लगती है तो वहां के अनुसार दौड़ नहीं कर पाते। इसलिए काफी युवा भर्ती में फेल हो जाते हैं। मैदान में तैयारी अच्छी होती है। -राकेश, गांव रफीपुर
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