लखनऊ के सियासी घटनाक्रम पर संभल में राजनीतिक गहमागहमी बनी रही। समाजवादी पार्टी में इन दिनों चल रही नूरा कुश्ती पर हर किसी की नजर रही। सपा के आमोखास कार्यकर्ता खासे बेचैन नजर आए। कुछ तो आहत दिखे। वह सपा नेताओं में छिड़ी वर्चस्व की जंग को खत्म करने की वकालत कर रहे थे।
अधिकतर कार्यकर्ताओं की निगाहें टीवी पर लगी थीं। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रति समर्थन जाहिर किया, लेकिन यह भी कहा कि जितनी जल्दी हो विवाद खत्म होना चाहिए। पार्टी एकजुट होकर लड़े।
समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्यमंत्री को बनाए जाने के बाद कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर खुशी का इजहार किया। जिला सचिव सईद अख्तर इसराईली नेतृत्व में जुलूस मोहल्ला हिलारी सराय से शुरू होकर एजेंटी तिराहा, चमन सराय, अस्पताल चौराहा होते हुए शंकर कॉलेज आकर संपन्न हुआ।
सपाइयों ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव में फिर से सपा की ही सरकार बनेगी। ताहिर तुर्की, डा. मुस्तफा, आसिफ इकबाल, बिट्टू वारसी, सलीम कुरैशी, जाहिद अंसारी, जरीफ, नावेद खान, डा. रहमान, आसिफ, जीशान, आरिफ इंतेजार, नवील अहमद, याहिया खां, शान आलम, धर्मेंद्र, अजय यादव मौजूद रहे।
सपा कार्यालय लाइव
स्थान-दीपासराय - समय-4.00 बजे - डा. शफीकुर्रहमान बर्क के कार्यालय पर कुछ समर्थक मौजूद थे। वे टीवी देख रहे थे। लोगों में यही सवाल था कि अब सपा में क्या होगा? जियाउर्रहमान को टिकट मिलेगा या नहीं? टिकट के संबंध में कुछ समर्थकों ने लखनऊ में जियाउर्रहमान बर्क से फोन पर बातचीत की। उनका जवाब आया- वे लखनऊ में हैं और पैरवी चल रही है। कामयाबी मिलने की उम्मीद है। यहीं पर मौजूद छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष रजीउर्रहमान ने कहा कि सपा में जो कुछ भी हो रहा है, वह खत्म होना चाहिए और पार्टी को एकजुट होकर विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहिए। मोहम्मद कासिफ ने कहा कि यह ऐसा वक्त है, जब पुराने समाजवादियों को मुलायम सिंह यादव का साथ खड़े होना चाहिए। पार्टी को तभी मजबूती मिलेगी।
स्थान-मियां सराय - नवाब इकबाल महमूद का किला। किले पर दिन में दो बजे 60-70 समर्थक मौजूद थे। कुछ लोग आपस में बातचीत कर रहे थे। कुछ टीवी पर नजरें गड़ाए थे। कैबिनेट मंत्री नवाब इकबाल महमूद तो लखनऊ में थे, जबकि सुहेल इकबाल क्षेत्र में निकले थे। इस मौके पर मौजूद समर्थकों का कहना था कि सपा का घमासान जितनी जल्दी खत्म हो जाएगा, उतना ही फायदा पार्टी को मिलेगा। कैबिनेट मंत्री के करीबी मुंशी वाहिद का कहना था कि पार्टी को मजबूत करना है, तो चुनाव में जुटना होगा। आपसी विवाद जल्दी की सुलझा लिए जाएं तो बेहतर होगा।