संभल। गांव कसेरूआ में ध्वस्त कराई गई मस्जिद मुस्तफा कादरी पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं। संभल के सपा विधायक इकबाल महमूद और गुन्नौर के सपा विधायक रामखिलाड़ी यादव ने मंगलवार को डीएम और एसपी से मिलकर दावा किया कि मस्जिद वक्फ बोर्ड में दर्ज थी। मस्जिद कमेटी द्वारा दिखाए गए दस्तावेज अधिकारियों ने नहीं देखे। इससे पहले सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और असमोली की सपा विधायक पिंकी यादव भी प्रतिक्रिया दी थी।
संभल के विधायक ने कहा कि मस्जिद पुरानी थी और वक्फ बोर्ड में दर्ज थी। मस्जिद कमेटी ने तहसीलदार कोर्ट की कार्रवाई के दौरान दस्तावेज भी दिखाए थे, लेकिन दस्तावेज पर अधिकारियाें ने ध्यान नहीं दिया। जो कार्रवाई की गई है वह उचित नहीं है। विधायक ने इस कार्रवाई को गलत बताया है। अधिकारियाें से ग्रामीणों के हित में कार्रवाई करने का आग्रह भी किया है। क्योंकि गांव में यह अकेली मस्जिद थी और बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा करते थे। विधायक ने कहा कि उन्हें अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि वह इस मामले में आगे सुनवाई करेंगे। मामले की जांच की जाएगी।
00000
सांसद बर्क का दावा- 1995 के प्रदेश गजट में मस्जिद का उल्लेख
सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा है कि मस्जिद करीब 150 वर्ष पुरानी थी। उन्होंने दावा किया कि यह वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज थी। 1984 से वक्फ रिकॉर्ड में है। 1995 के उत्तर प्रदेश गजट में भी इसका उल्लेख मौजूद है। सांसद बर्क का कहना है कि वक्फ संपत्ति विवादों की सुनवाई केवल वक्फ ट्रिब्यूनल कर सकता है। तहसीलदार, एसडीएम या डीएम जैसे प्रशासनिक अधिकारियों को यह अधिकार नहीं है। संवाद