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श्री मद भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन हुआ

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संभल। गांव अकबरपुर गहरा में चल रही श्रीमदभागवत कथा के पांचवे दिन पंडित कवित शास्त्री जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। कहा कि भगवान अपने भक्त के हर भाव को पहचानते हैं। बताया कि जब भगवान गो-चरण करने के लिए गए तो वहां अघासुर वत्सासुर धेनुकासुर आदि राक्षस गो-गोपालको को कष्ट देने आए। जिस पर भगवान ने सभी की रक्षा करी। बताया कि भगवान कन्हैया ने अपने सभी सखाओं से कहा कि हम आज मधुमंगल के घर का भोजन करेंगे। किसी और के घर का नहीं। मधुमंगल अपने घर गया और अपनी माता पूरनमासी जो कि बहुत गरीब थीं। उनसे कन्हैया के भोजन की व्यवस्था के लिये कहने लगा। इस पर बेचारी निर्धन माता की आंखो से आंसू निकल पड़े। और बोलीं बेटा तुम तो जानते ही हो हमें एक समय का भोजन भी ठीक से नहीं मिल पाता है। इस पर मधुमंगल ने अपने घर में ढूंढ़ने पर पाया कि एक हांड़ी में तीन दिन पुरानी कड़ी रखी है। मधुमंगल ने सोचा कि दूध दही माखन को खाने वाले अपने प्यारे सखा को मैं ये नहीं खिला सकूंगा। इसलिए मधुमंगल उस कड़ी को झाड़ी में छुपकर अकेले ही पीने लगा। इस पर वहां कन्हैया आ जाते हैं। और छुपकर कड़ी पीने का कारण पूछते हैं। इस पर मधुमंगल ने सारा वृतांत सुनाया और भगवान कन्हैया के प्रेमाश्रु प्रवाहित हो गए।
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