बीईओ के मुताबिक विद्यालय में करीब पौने दो सौ से अधिक विद्यार्थी थे। विद्यार्थियों की छुट्टी कराकर भवन को सील कर दिया गया। जानकारी लेने पर सामने आया कि विद्यालय में पूर्व में आरके पब्लिक स्कूल के नाम से बिना मान्यता विद्यालय संचालित था। इससे तत्कालीन बीईओ को 11 दिसंबर 2024 को सील कराया गया था।
बीईओ का कहना था कि संचालक की ओर से नियम विरुद्ध तरीके से नाम बदलकर मदरसा के नाम से फर्जी विद्यालय आवासीय भवन में संचालित किया जा रहा था, जो कि बाद में 13 मई 2025 को किए गए निरीक्षण में सील कर दिया गया।
बीएसए के मुताबिक बिना मान्यता विद्यालय बंद कराए जाने पर संचालक के खिलाफ एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। वहीं, 11 दिसंबर 2024 से बंद कराया गया विद्यालय बीईओ के निरीक्षण में 13 मई 2025 को दोबारा संचालित मिला था। इससे विद्यालय बंद कराए जाने की तिथि से दोबारा सील किए जाने की तिथि तक 10 हजार रुपये के हिसाब से 153 दिन का 15.30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार विभाग की ओर से विद्यालय संचालक के खिलाफ 16.30 लाख रुपये का जुर्माना किया गया है।
जिले के 43 अमान्य विद्यालयों पर भी एक-एक लाख रुपये जुर्माना
- बीएसए अलका शर्मा के मुताबिक जिले के सभी बीईओ की ओर से किए गए निरीक्षण में 43 अमान्य विद्यालय संचालित मिले थे। पूरी विभागीय जांच-पड़ताल के बाद अब इन सभी अमान्य विद्यालयों के संचालकों के खिलाफ एक-एक लाख रुपये जुर्माना किए जाने की कार्रवाई की जा रही है।