लिमिट के तहत निकाली गई रकम जमा करने के बावजूद बैंक शाखा की ओर से बैनामा की मूल प्रति वापस नहीं करने पर उपभोक्ता ने वाद दायर किया था।
अधिवक्ता लवमोहन वार्ष्णेय एडवोकेट ने बताया कि बहजोई निवासी उपभोक्ता मैसर्स जयशंकर लाल सुरेश चंद्र की अनाज मंडी समिति में आढ़त की दुकान है। आढ़ती ने अपने व्यापार के लिए भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में अपना बैनामा की मूल प्रति जमा कर लिमिट बनवाई थी। आढ़ती की ओर से लिमिट के तहत निकाली गई रकम का पूरा भुगतान 08 अगस्त 2013 में राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से कर दिया गया। इसके बाद आढ़ती ने अपने बैनामा की मूल प्रति की मांग शाखा प्रबंधक से की और इसके लिए तय फीस भी जमा कर दी। बावजूद इसके आढ़ती को उसके मूल बैनामे की प्रति वापस नहीं की गई। इस पर आढ़ती ने 13 मई 2016 को न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम संभल में परिवाद दाखिल किया। सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ। इस पर फोरम की ओर से एक पक्षीय आदेश जारी किया गया और विपक्षी को आदेशित किया गया कि वह परिवादी को मूल बैनामा की प्रति वापस करने के साथ-साथ पांच हजार रुपये बतौर क्षति पूर्ति व 1500 रुपये वाद व्यय अदा करे। शाखा प्रबंधक ने आदेश के अनुपालन में कोई गंभीरता नहीं दिखाई। इसके बाद परिवादी ने एक बार फिर फोरम का दरवाजा खटखटाया।
इस पर फोरम ने शाखा प्रबंधक के खिलाफ जमानतीय गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं।