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Sambhal violence: सत्यव्रत पुलिस चौकी की बाउंड्री और लिंटर का काम पूरा, 26 को नहीं... फरवरी में लोकर्पण संभव

Fri, 24 Jan 2025 11:22 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, संभल

सार

संभल की जामा मस्जिद के पास बन रही सत्यव्रत पुलिस चौकी का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। गणतंत्र दिवस तक इसका लोकार्पण संभव नहीं है। 24 नवंबर 2024 को हुए बवाल के बाद सुरक्षा बढ़ाने के लिए चौकी निर्माण का फैसला हुआ था। यह चौकी पालिका की जमीन पर बनाई जा रही है।
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सत्यव्रत पुलिस चाैकी का निर्माण जारी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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संभल की जामा मस्जिद के नजदीक बन रही सत्यव्रत पुलिस चौकी का निर्माण तेजी से पूरा कराया जा रहा है। बाउंड्री से लेकर लिंटर का काम पूरा हो गया है। अब कक्ष का काम तेजी से पूरा कराया जा रहा है। पुलिस चौकी के भवन में प्लास्टर और फिनिशिंग का कार्य किया जाना बाकी है।

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गणतंत्र दिवस तक इस पुलिस चौकी में स्टाफ तैनात किए जाने की उम्मीद थी लेकिन कार्य काफी अधूरा होने के चलते गणतंत्र दिवस तक इस पुलिस चौकी का लोकार्पण होना मुश्किल है। 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद सर्वे के दौरान बवाल हो गया था। इस दौरान पुलिस ने घेराबंदी कर ली थी।

भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज करने के साथ आंसू गैस के गोले व रबर बुलेट का इस्तेमाल किया था। इस बवाल के बाद ही पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के लिए पुलिस चौकी का निर्माण कराने का निर्णय लिया था। यह पुलिस चौकी पालिका की जमीन पर बनी है।

संभल दंगे की जांच एनआईए से कराए जाने की मांग

संभल में 1978 में हुए दंगे की एनआईए से जांच कराए जाने के लिए प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को दिया गया। बृहस्पतिवार की दोपहर कलक्ट्रेट पर दिए गए ज्ञापन में हिंदू शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिमरन गुप्ता ने बताया कि जिला संभल में मार्च 1978 में हुए दंगे के दौरान सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 184 हिंदुओं की हत्या कर दी गई थी।

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हजारों की संख्या में हिंदुओं का पलायन हुआ था। उनकी संपत्ति पर स्थानीय दूसरे समाज के लोगों ने कब्जा कर लिया था। दंगे की जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। साथ ही पलायन किए हुए लोगों की संपत्ति भी वापस नहीं की गई।

इससे हिंदुओं की आबादी कम होती गई और दूसरे समाज के लोग उनकी संपत्तियों पर अवैध कब्जा करते रहे। इसका खुलासा बीते दिनों दंगे की जांच में सामने आया। तत्कालीन सरकार ने दंगे से जुड़े मुकदमों को वापस लेकर न्यायहित को नुकसान पहुंचाया है। इसके चलते मार्च 1978 में संभल में हुए दंगे की जांच एनआईए से कराई जाए।

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