संभल में सीओ अनुज चाैधरी, एएसपी के साथ गश्त करते हुए (फाइल)
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पहले से ही दिव्यांग है आलम
22 वर्षीय आलम की बहन रजिया ने बताया कि उनका भाई तो पहले से दिव्यांग है। तीन पहिया ठेले से बिस्किट बेचता है। गोली लगने के बाद किसी तरह जान तो बच गई है लेकिन शरीर पूरी तरह कमजोर हो गया है। बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर है। पिता के अलावा भाई भी कमाता था जिससे घर का खर्च चलता है। लेकिन इलाज में उधार तक हो गया है।
संभल हिंसा को एक साल पूरा
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यामीन की बेटी बोली-उन्हें धमकाया जा रहा
यामीन की बेटी रजिया ने बताया कि उनका भाई तो मजदूरी पेशा है। तीन गोलियां लगी थीं। बमुश्किल जान बची है। हमारी अधिकारियों ने सुनवाई नहीं की तो पिता कोर्ट पहुंचे। जहां से न्याय मिलने की उम्मीद है। एक वर्ष से हमारा पूरा परिवार परेशान है। घर पर पुलिस आती है और धमकाती है। हमारे पिता और भाई कहीं चले गए हैं। पूरा परिवार डरा हुआ है।