साक्ष्य के अभाव में पुलिस ने 29 दिसंबर 2024 को कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। बाद में बीमा कंपनी टाटा एआईए के इन्वेस्टीगेटर को घटना संदिग्ध लगी। जांच में सामने आया कि दरियाव के नाम पर टाटा एआईए, बजाज एलियांस, आईसीआईसीआई, रिलायंस जनरल और किसान बीमा सहित कुल 50,68,000 रुपये की पॉलिसी थी।
इन पॉलिसियों में से अधिकतर की नामिनी मृतक का भाई राजेंद्र था। दरियाव की बीमा पॉलिसियों के दस्तावेजों में दर्ज मोबाइल नंबरों की जांच में भी संदेहजनक गतिविधियां सामने आईं। साक्ष्य एकत्र करने के बाद पुलिस ने हरिओम, विनोद, पंकज राघव को पूछताछ के लिए बुलाया।
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पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर उन्होंने दरियाव को वाहन से कुचलकर हत्या की और इसे एक्सीडेंट का रूप दिया, ताकि बीमा की रकम हासिल की जा सके। पुलिस के अनुसार मृतक दरियाव विवाहित थे और उनकी एक नाबालिग पुत्री है।
पूर्व में एक दुर्घटना के कारण वह लकवाग्रस्त हो गए थे और आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते भीख मांगकर जीवन यापन करते थे। इतनी बड़ी संख्या में पॉलिसियों का प्रीमियम भरना उनके लिए संभव नहीं था।
मामले की जांच में यह भी सामने आया कि बीमा क्लेम फॉर्म और इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट में हरिओम और विनोद के नाम गवाह के रूप में दर्ज थे। पॉलिसी दस्तावेजों में पंकज राघव का मोबाइल नंबर बार-बार सामने आया। पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।