संभल के प्राचीन 68 तीर्थ और 19 कूप को उनके मूल स्वरूप में लौटाने और कब्जा मुक्त कराने का अभियान चलाया जा रहा है। डीएम ने निरीक्षण कर चहारदीवारी, मार्ग और संवर्धन के निर्देश दिए। मनरेगा और वंदन योजना से कूप और तीर्थों का संरक्षण किया जाएगा।
संभल महात्म्य में 68 तीर्थ और 19 कूप का उल्लेख हैं। 19 कूप जो मिले हैं, इनमें भी ज्यादातर को पाट कर बंद कर दिया गया था। क्योंकि अभी 34 तीर्थ ऐसे हैं, जिन्हें प्रशासन भी चिह्नित नहीं कर सका है। आशंका है कि अन्य तीर्थ भी पाटकर नष्ट न कर दिए गए हों। डीएम का कहना है कि तीर्थ वहीं बनते थे जो तालाब हुआ करते थे।
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समय के साथ उन पर कब्जे हो गए। अब पालिका और ग्राम पंचायत स्तर से तीर्थ कब्जा मुक्त किए जा रहे हैं। डीएम ने बताया कि तीर्थ और कूप जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए इनका पुराने स्वरूप में लौटाया जाना जरूरी है।
तीर्थ और कूप पुराने स्वरूप में लौटाए जाएंगे : डीएम
प्राचीन तीर्थ और कूप को संवारने और कब्जा मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने चतुर्मुख कूप, अशोक कूप, चतुर्थ सागर, एकांती तीर्थ और शंख माधव का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने एकांती तीर्थ, चतुर्थ सागर और शंख माधव की चहारदीवारी व मार्ग की व्यवस्था के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा लेखपाल से मौके पर जाकर भूमि की नाप कर भूमि की स्थिति बताने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने बताया कि अशोक कूप को पालिका द्वारा वंदन योजना के अन्तर्गत संवारा जाएगा। बताया कि जो कूप और तीर्थ ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं उनको मनरेगा एवं ग्राम निधि के माध्यम से संवारा जाएगा।
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डीएम ने बताया कि 68 तीर्थ और 19 कूप का उल्लेख मिलता है। दस्तावेज में यह कूप और तीर्थ दर्ज हैं लेकिन किसी कारणवश इन पर कब्जे कर लिए गए। उन्हें मुक्त कराने का काम किया जा रहा है। साथ ही संवारने के लिए भी काम हो रहा है।