जब वह अपने पिता के साथ खुद की कक्षा से बड़ी कक्षाओं में बैठते थे, जो सामने बैठे बच्चों से पूछे जाने वाले सवालों के जवाब पलक झपकते ही दे देते थे।
उनके सीबीडीटी के चेयरमैन बनने से मित्रगणों और परिजनों में खुशी की लहर हैं। अब प्रत्यक्ष कर बोर्ड के सबसे ऊंचे अधिकारी बनने के बाद उनके मित्र पुरानी यादों से सुशील चंद्रा का जिक्र कर फूले नहीं समा रहे।
विद्या सागर गुप्त के चार पुत्रों में सबसे बड़े पुत्र सुशीलचंद्रा (आईआरएस) को इनकम टैक्स विभाग में देश की सबसे बड़ी कुर्सी मिलने के बाद चंदौसी में खुशी की लहर है। चंदौसी के आनंद विहार कालोनी निवासी विद्या सागर गुप्त बताते हैं कि उनके चार बेटों में सुशील सबसे बड़े हैं। इंटरमीडिएट तक की शिक्षा उन्होंने चंदौसी में ही ग्रहण की। वह पढ़ाई व अपने कार्य के प्रति बचपन से ही काफी गंभीर थे। सुबह चार बजे उठकर तीन घंटे लगातार पढाई करते थे।
इसके बाद दैनिक दिनचर्या के निपटते हुए कालेज जाना। फिर कुछ देर दोस्तों के साथ खेलना। फिर रात को फिर तीन घंटे की पढ़ाई करना उनका शेड्यूल था।
उनकी पढाई के प्रति लगन को देखते हुए एसएम कालेज के अन्य अच्छे शिक्षकों से अनुरोध करके बेहतर मार्गदर्शन दिलवाया गया। मैथ व इंग्लिश में शिक्षकों ने उन्हें अलग से पढ़ाया। यहां तक की पढ़ाई का खर्च तो परिवार ने किया लेकिन इंटरमीडिएट के बाद उनके बेहतर अंकों के बल पर रुड़की विश्वविद्यालय में बिना किसी टेस्ट के दाखिला मिल गया। इसके बाद आईआरएस बनने तक और अब सीबीडीटी के चेयरमैन बनने तक का सफर अपनी मेहनत और लगन से ही तय किया।