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शिक्षकों से वसूले 300-300 रुपये, नहीं दिए झंडे

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संभल। असमोली ब्लॉक क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों से तिरंगा झंडे के नाम पर 300 रुपये प्रति शिक्षक बीआरसी केंद्र के द्वारा लिए गए लेकिन उन्हें झंडे नहीं पहुंचाए। बीएसए तक मामले की शिकायत पहुंची तो उन्होंने जांच के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि शिक्षकों से रुपये नहीं लेने थे।
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असमोली ब्लॉक क्षेत्र के 157 विद्यालयों में तैनात 400 से ज्यादा शिक्षकों से प्रति शिक्षक 300 रुपये लिए गए हैं। एक परिषदीय विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि उनके विद्यालय में सात शिक्षकों का स्टाफ है। सभी से 300 रुपये लिए हैं। उन रुपयों को झंडे के नाम पर लिया गया था लेकिन विद्यालयों में वह झंडे आए ही नहीं। एक अध्यापक ने बताया कि इसके लिए बीआरसी का जो व्हाट्सएप ग्रुप है उस पर मैसेज आया था कि प्रति शिक्षक 300 रुपये देने हैं। उसके मुताबिक सभी शिक्षकों ने रुपये दिए थे। जब शिक्षकों से जानकारी ली कि उन्होंने शिकायत क्यों नहीं की तो उन्होंने बताया कि अधिकारियों की जानकारी में है। ऐसे में किसी शिक्षक ने शिकायत की तो उल्टी शिक्षक पर कार्रवाई हो जाएगी। इसलिए कोई सामने नहीं आ रहा है।
पवांसा ब्लॉक में प्रति विद्यालय 400 से 500 रुपये लिए गए
जिले के पवांसा ब्लॉक में प्रति विद्यालय के हिसाब से शिक्षकों से रुपये लिए गए। शिक्षकों ने बताया कि जो रुपये इकट्ठा हुए उससे झंडे खरीदे जाने की जानकारी मिली थी। वह झंडे कहां लगाए गए इसकी जानकारी नहीं है। ऐसे ही रुपये बहजोई, रजपुरा, गुन्नौर, जुनावई, संभल और बनियाठेर ब्लॉक में शिक्षकों से लिए गए हैं।
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40 हजार झंडे तैयार कराने के लिए शिक्षा विभाग को मिला था लक्ष्य
बेसिक शिक्षा विभाग को जिला प्रशासन की ओर से 40 हजार झंडे खरीदने का लक्ष्य मिला था। असमोली बीआरसी की ओर से पांच हजार झंडे दिए जाने थे। एनपीआरसी के माध्यम से इन्हीं झंडे के लिए व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज किया गया। खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि उन्हें पांच हजार झंडे दिए जाने का लक्ष्य मिला था जो पूरा कर दिया गया है।
एनपीआरसी के माध्यम से झंडे तैयार कराने के लिए कहा गया था। एनपीआरसी ने प्रति शिक्षक रुपये लिए इसकी जानकारी नहीं है। यह एनपीआरसी ही जानें, हमें कोई जानकारी नहीं है।
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सुल्तान अहमद, खंड शिक्षा अधिकारी, असमोली
शिकायत भी मिली है। उसकी जांच के लिए निर्देश दिए हैं जिससे हकीकत सामने आ सके। शिक्षकों से रुपये नहीं लेने थे।
चंद्रशेखर, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, संभल
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