संभल। 29 मार्च 1978 को शहर में एक अफवाह के कारण दंगा भड़क उठा था। इससे पूरा शहर जल गया था और दो महीने तक कर्फ्यू लगा रहा था। इस दंगे की चर्चा 2024 में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल के बाद फिर से शुरू हुई थी। इसके बाद ही पीड़ित परिवार सामने आए थे।
मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों की मदद करने का आश्वासन दिया था। इसी क्रम में एक परिवार को आवासीय भूमि का पट्टा दिया गया है। बताते हैं 1978 के दंगे की शुरुआत मुस्लिम लीग के नेता मंजर शफी के हंगामा करने पर हुई थी। वह उस समय के एसडीएम की किसी बात पर नाखुश था और उसने इसी बात पर बाजार में हंगामा करते हुए दुकानों को बंद कराना चाहा था। हिंदू व्यापारी मंजर शफी के विरोध में खड़े हो गए थे।
इस दौरान खूब मारपीट हुई थी। मंजर शफी के जो साथी मौके से भागे उन्होंने मंजर शफी के मारे जाने की अफवाह फैला दी थी। इसके बाद ही पहले बाजार और फिर पूरे शहर में दंगा भड़क गया था। दुकानों में लूटपाट, पथराव और आगजनी की घटनाएं हुईं थीं। इसमें कई लोगों की मौत हुई थी। दंगे के बाद 169 प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। जिनमें से तीन पुलिस ने दर्ज कराई थीं। संवाद