बहजोई। करीब पौने तीन माह बीत जाने के बाद भी जिले के 10 कस्तूरबा विद्यालयों में संविदा पर तैनात करीब सवा सौ स्टाफकर्मियों का नवीनीकरण अब तक नहीं हो सका है। इसके चलते इन कर्मियों को दो माह का मानदेय भी नहीं मिल सका है। नतीजतन, सभी कस्तूरबा विद्यालय कर्मी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
जिले में 10 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हैं। इनमें ब्लॉक बनियाखेड़ा व रजपुरा के उच्चीकृत कस्तूरबा विद्यालय भी शामिल हैं। इन सभी विद्यालयों में पूर्णकालिक व अंशकालिक शिक्षिकाओं के साथ उर्दू और कंप्यूटर जैसे विषयों की शिक्षिकाएं भी तैनात हैं। इसके अलावा विद्यालयों में लेखाकार, मुख्य व सहायक रसोइया, चपरासी और चौकीदार भी कार्यरत हैं।
अब मई माह का अंतिम सप्ताह शुरू होने को है, लेकिन पौने तीन माह बीतने के बाद भी इन सभी विद्यालयों में तैनात करीब सवा सौ कर्मियों का नवीनीकरण नहीं हो सका है। नवीनीकरण लंबित होने से इन संविदाकर्मियों का मार्च 2025 व अप्रैल 2026 का मानदेय भी अटका हुआ है। वहीं, मई माह भी समाप्ति की ओर है। इससे इन सभी संविदाकर्मियों पर आर्थिक संकट गहरा गया है। यह स्थिति तब है, जब सर्व शिक्षा अभियान परियोजना की ओर से प्रत्येक वित्तीय वर्ष में फरवरी माह तक संविदाकर्मियों का नवीनीकरण कराए जाने के स्पष्ट निर्देश हैं।
हालांकि विभागीय अधिकारियों की ओर से नवीनीकरण प्रक्रिया को गतिमान बताया जा रहा है, लेकिन फिलहाल यह औपचारिकता तक ही सीमित नजर आ रही है।
कस्तूरबा विद्यालयों में तैनात शिक्षिकाओं व लेखाकारों समेत अन्य संविदाकर्मियों के नवीनीकरण के लिए प्रक्रिया जारी है। नवीनीकरण से जुड़ी फाइल उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। जल्द ही इन संविदाकर्मियों का नवीनीकरण होने की पूरी उम्मीद है। इसके बाद इन सभी कर्मियों को रुका हुआ मानदेय भी उपलब्ध करा दिया जाएगा।
अलका शर्मा, बीएसए