उपभोक्ता को भले ही टमाटर दस रुपये प्रति किलोग्राम में नसीब हो रहा हो पर मंडी में टमाटर की बड़ी बेकदरी हो रही है। टमाटर मंडी में इतना अधिक आ रहा है, उससे आधा भी नहीं बिक पा रहा है। बिक्री से बचे हुए टमाटर को या तो फेंका जा रहा है या फिर पशुओं को खिलाया जा रहा है।
मंडी में शुक्रवार को टमाटर का भाव एक रुपये प्रति किलोग्राम हो गया था। हैरत की बात तो यह थी कि इस कीमत पर भी कोई खरीदार नहीं था। कारोबारियों और किसानों ने बताया कि आमतौर पर बारिश होनेे और बीमारी लगने से टमाटर की आधी फसल प्रति वर्ष मारी जाती थी। खपत के मुकाबले उपज थोड़ी सी कम ही रह जाती थी। इसलिए टमाटर का भाव बना रहता था लेकिन इस बार फसल पर्याप्त है और खपत नहीं है। अधिक उत्पादन को खपाने की गुंजाइश नहीं है।
इसलिए टमाटर सड़ रहा है और फेंका जा रहा है। वहीं आलू के दाम में अचानक मंदी आ गई है। फायदे की उम्मीद में आलू रोक कर चल रहे किसानों को झटका लगा है। हालांकि आलू की पिछले वर्ष की तरह बेकदरी नहीं है पर आलू के दाम बड़ी तेजी के साथ टूटे हैं। एक महीने पहले जो चिप्सोना आलू 1800 रुपये प्रति क्विंटल हो गया था। वह आलू अब 1350 रुपये प्रति क्विंटल के दाम पर पहुंच गया है। पुखराज 15 दिन में 1,300 से घटकर 1,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।
वहीं आलू की 3797 प्रजाति 1300 रुपये प्रति क्विंटल घटकर 1200-1225 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। वहीं, मंडी में एक दिन में 30 टन टमाटर आ रहा है, लेकिन बिक्री 15-20 टन की हो पा रही है। इसके चलते 10 टन से अधिक टमाटर फेंका जा रहा है क्योंकि टमाटर रखने में भी कोई फायदा नहीं है। आढ़तियों का कहना है कि एक रुपये प्रति किलोग्राम में भी टमाटर का खरीदार नहीं है।