वायस रिकार्डिंग मसले पर बात करतीं महिलाएं।
मुख्य विकास अधिकारी और स्वच्छ भारत मिशन की जिला समन्वयक (महिला संविदा कर्मचारी) के उत्पीड़न और व्हाटसएप पर वायरल हुई दोनों के बीच बातचीत की ऑडियो रिकार्डिंग का मामला दिनभर लोगों की जुबां पर रहा। वहीं एससी/एसटी संगठनों का अखिल भारतीय परिसंघ की महिला नेताओं ने सीडीओ कार्यालय पर जमकर हंगामा किया।
कर्मचारियों ने दरवाजा बंद कर लिया तो पीटते पीटते उसकी कुंडी तक तोड़ दी। डीएम व डीपीआरओ कार्यालय पर भी जमकर हंगामा किया। सीडीओ तो नहीं मिले लेकिन अन्य अफसरों से जमकर नोकझोंक भी हुई।
फिलहाल तो जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए एडीएम व एआरटीओ की सहभागिता में दो सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है जो पांच मई तक अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। गुरुवार सुबह से ही हर अधिकारी और कर्मचारी की जुबां पर सीडीओ व डिस्ट्रिक कोआर्डिनेटर के बीच बातचीत की सोशल मीडिया पर वायरल हुई ऑडियो रिकार्डिंग चर्चा का विषय थी।
सीडीओ सुबह से ही कार्यालय नहीं आए। मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ था। इसी बीच वहां अखिल भारतीय परिसंघ की मेरठ मंडल की प्रभारी निर्देश रानी व मुरादाबाद मंडलाध्यक्ष बीना भारती के साथ बहजोई पहुंची।
सीडीओ कार्यालय को कर्मचारियों ने अंदर बंद कर रखा था, दोनों महिला नेताओं ने दरवाजा खटखटाया, नहीं खुला तो धक्के मारे, जिससे दरवाजे का कुंडा टूट गया। बाद में महिला नेताओं ने जिलाधिकारी से मिलकर सीडीओ पर दलित महिला कर्मचारी का शोषण का आरोप लगाया और सीडीओ के निलंबन की मांग की।
डीपीआरओ रणधीर सिंह से भी तीखी नोकझोंक हुई। महिला नेताओं ने सभी उच्चाधिकारियों की मिलीभगत होने का आरोप लगाया। जिलाधिकारी ने डिस्ट्रिक कोआर्डिनेटर को भी बुलाया था। जिससे यह भी पूछा गया कि उसका उत्पीड़न कई महीनों से हो रहा है तो उसने 1090 पर या फिर डीएम से मिलकर शिकायत क्यों नहीं की। बाद में यह महिला कर्मचारी भी नदारद हो गई। हालांकि इस पूरे मामले में अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग ने रिपोर्ट मांगी है।