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Sambhal News: चूहे मार दवाई खाकर, चूहे नहीं मरा करते....

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संभल। अंतर्राष्ट्रीय साहित्य कला संगम के द्वारा विश्व गौरैया दिवस और विश्व कविता दिवस का संयुक्त कार्यक्रम हुआ। इस मौके पर सुभाष चंद्र शर्मा ने समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार पर तीखा प्रहार करते हुए सुनाया -नकली घी, दूध और दवा स्वास्थ्य को लाभ नहीं करते हैं। चूहे मार दवाई खाकर, चूहे नहीं मरा करते हैं।
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महामंत्री पूनम शुक्ला के आवास पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत सुभाष चंद्र शर्मा, शिव शंकर शर्मा, सुमंत शुक्ला ने मांं सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप जलाकर और माल्यार्पण करके की। डॉ. विजय लक्ष्मी शर्मा ने सरस्वती वंदना और भारत वंदना सुनाई। व्यंग्य के सशक्त कवि अतुल कुमार शर्मा ने काव्य गोष्ठी की शुरुआत करते हुए सुनाया- अब चिंता नहीं गौरैया तुम्हारे दिन आएंगे अच्छे, 20 मार्च विश्व गौरैया दिवस पर तुम्हें देखने आएंगे स्कूली बच्चे। कविता सुनाकर सभी को भाव विभोर कर दिया। पूनम शुक्ला ने निमंत्रण दे रही तुम्हारे गांंव की माटी, मांं की गोद सी पावन तिलक चंदन सी ये माटी।
पूजा शर्मा ने गौ सेवा प्रक्रिया पूर्ण की। विश्व कविता दिवस पर चर्चा करते हुए संस्थापक डॉ. डीएन शर्मा ने कहा कि इस भूमंडल पर जितनी भी प्रमुख भाषाएंं हैं, उनमें कविता ही जन-प्रेरणा का सशक्त माध्यम रही है। कविता की इसी शक्ति को पहचान करके संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन 1999 में विश्व स्तर पर कविता के महत्त्व को स्वीकार करते हुए 21 मार्च को विश्व कविता दिवस घोषित किया और विश्वभर के कवियों तथा उनकी कविताओं को सम्मान दिया।
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मुख्य अतिथि प्रधानाचार्य शिव शंकर शर्मा ने 20 मार्च विश्व गौरैया दिवस के विषय में बताया। सुमंत शुक्ला ने बताया कि गौरैया दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हमें पक्षियों की सेवा करने का नियम बना लेना चाहिए।
इस दौरान शिव शंकर शर्मा, नवीन प्रकाश शर्मा, संजय कुमार गुप्ता, कमलकांत तिवारी, केके शर्मा, जया शुक्ला, निधि शर्मा, संजय गुप्ता, आयुष शुक्ला, सिया शुक्ला, शिवानी शर्मा, आद्रिका आदि रहे।
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