फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मिर्च लुढ़की, ‘माटी’ के मोल बिक रही गोभी

Tue, 18 Apr 2017 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
विज्ञापन
संभल की मंडी में गोभी बेचने आया किसान। अमर उजाला - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
आलू की बेकद्री से किसान उबरे भी न थे कि, मिर्च और गोभी की बंपर पैदावार ने कमर ही तोड़ दी है। बंपर उत्पादन से किसानों को अच्छा भाव नहीं मिल रहा है। नतीजतन मिर्च किसानों को हर बीघा उत्पादन पर पांच हजार रुपये से अधिक और गोभी किसानों को साढ़े हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। इतने बड़े नुकसान से किसान मायूस हैं, अगर इसके लिए भी समर्थन मूल्य घोषित तभी किसानों को कुछ राहत मिल सकती है।      
विज्ञापन

    
वर्तमान में मंडी में मिर्च की 4884 प्रजाति का रेट 14-15 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि अचार वाली मिर्च क्रांति प्रजाति 6-7 रुपये प्रति किलोग्राम ही बिक रही है। मिर्च इतनी सस्ती पिछले कई वर्ष में नहीं रही। किसानों के मुताबिक, एक बीघे में तकरीबन आठ से दस क्विंटल मिर्च का उत्पादन होता है।

इस तरह एक हजार किलो मिर्च की तुड़ाई हो गई पांच हजार रुपये (पांच रुपये प्रति किलो के हिसाब से)। इससे पूरे उत्पादन में किसान को तकरीबन बीस हजार रुपये खर्च करने पड़े और उत्पादन की बिक्री से किसान की आमदनी पंद्रह हजार रुपये (1000 किलो की कीमत 15 रुपये के हिसाब से) हो रही है। इस तरह किसानों को पांच हजार रुपये प्रति बीघे का नुकसान ही हो रहा है। इसमें ट्रांसपोर्टेशन-स्प्रे आदि का खर्च जोड़ दिया जाए तो नुकसान और बढ़ जाता है।
विज्ञापन


खुदरा मार्केट में दो से तीन रुपये प्रति किलोग्राम वाली गोभी मंडी समिति में 15 रुपये का 25 किलोग्राम है। यानी एक रुपये प्रति किलोग्राम से भी कम के भाव पर गोभी बिक रहा है। किसानों का कहना है कि, एक बीघा गोभी के उत्पादन में किसान को तकरीबन दस हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं और उत्पादन तकरीबन 20 क्विंटल मतलब 2000 किलोग्राम (एक क्विंटल में सौ किग्रा) हुआ। इससे किसान को होने वाली आमदनी 75 पैसे प्रति किलो के हिसाब से 1500 रुपये ही हो रहे हैं। इस तरह गोभी किसानों को प्रति बीघा तकरीबन साढ़े आठ हजार का नुकसान हो रहा है।

एक दिन में संभल में 300-400 क्विंटल गोभी खेत से निकल रही है। इसमें 80 प्रतिशत माल दूसरी मंडियों में जाता है। स्थानीय मंडी में खपत 20 प्रतिशत की ही है। गोभी संभल में बेहद सस्ता है और या यों कहें कि माटी मोल है। बिक्री भी होना मुश्किल है। 

मंडी के व्यापारी फुरकान ने कहा कि गोभी के भाव में भारी उतार-चढ़ाव रहता है। पिछले सीजन में दो चार दिन के लिए अच्छा भाव आया था लेकिन उसके बाद बड़ी बेकदरी हुई। इस बार भी बेकदरी है क्योंकि दिल्ली समेत किसी भी मंडी में गोभी की मांग नहीं निकल पा रही है।

कई बार तो ऐसा होता है कि संभल में गोभी खरीदा और दिल्ली ले गए तो भाड़ा भी वसूल नहीं हुआ। ऐसे में व्यापारी इस गोभी को खरीद कर दूसरी मंडी में ले जाने का जोखिम नहीं उठा रहे हैं। संभल के कुछ किसान अपने रिस्क पर दूसरी मंडी में गोभी ले जाते हैं।  कई बार भाव मिलता तो कई बार भाव नहीं मिल पाता है। फिलहाल संभल मंडी में तो एक रुपये प्रति किलोग्राम से भी कम दाम पर गोभी बिक रहा है। 

जब भी कोई नया बीज विकसित होता है उस बीज को कंपनियां पूरे-पूरे एरिया में बांट देती हैं। किसान का बीज मिलने पर बुवाई करता है और जब बंपर पैदावार हुई तो इस बार रेट घट गए। इस बार 75 पैसे प्रति किलोग्राम गोभी का भाव थोक में है।  - कमरुज्जमा, आढ़ती, संभल मंडी।      
      
इतना बुराहाल गोभी और मिर्च का कभी नहीं रहा। अब की बार जो मिर्च 14-15 रुपये प्रति किलोग्राम मंडी में मिल रही है। उसका भाव पिछले वर्ष 35-40 रुपये प्रति किलोग्राम था। मिर्च ने पिछले वर्ष किसानों की कमाई कराई थी।  इस बार लागत वसूलना मुश्किल हो गया है। मोहम्मद एहसान, आढ़ती।        

जोताई-बोवाई के साथ स्प्रे पर करने पड़ते हैं खर्च
किसान को एक बीघा मिर्च की खेती में 12-15 हजार रुपये की लागत आती है। मिर्च पर लगने वाले रोग को रोकने के लिए किसान को जल्दी-जल्दी स्प्रे करने पड़ते है। साथ ही मिर्च तैयार होने के बाद जब उसकी तुड़ाई कराई जाती है तो मिर्च को तोड़ने वाले भी पांच रुपये किलो लेते हैं।

वहीं एक बीघा गोभी की फसल तैयार करने में किसान को 8-10 दस हजार रुपये लागत लगानी पड़ती है। गोभी कोई रोग न लगे इसके लिए किसान को जल्दी-जल्दी स्प्रे भी करना पड़ता है। 
विज्ञापन


 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें