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‘बुरे काम करने संग रोजा रखने से नहीं मिलता सवाब’

Sat, 27 May 2017 12:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
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शहर की मोती मस्जिद में बिजली की झालरों से बेहद खूबसूरत सजावट की गई है। रविवार शाम मस्जिद रोशनी से जगमगा उठी।
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सुबह सहरी, शाम को इफ्तार बस इसी का नाम रोजा रखना नहीं है। नफ्शे अंमारा यानी बुरी आदतों से तौबा करने को रोजा कहते हैं। इतना ही नहीं रोजा कई बीमारियों से बचाकर शारीरिक सफाई भी करता है। रोजा रखने से पाचन तंत्र मजबूत होता है।  
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न जुबां किसी को बुरा कहे, न आंखे किसी पर बुरी नजर डालेें, न दिमाग में कोई बुराई उपजेे, न कान किसी की बुराई सुने और न ही कदम बुराई के रास्ते पर आगे बढ़े। हाथों से कोई ऐसा काम न हो, जिससे किसी का दिल दुखे। यही है रोजे के मायने और यही करना चाहिए सच्चे रोजेदार को।

काजी मरगूब कहते हैं कि अल्लाह की रजा में राजी रहना ही रोजा है। जिसमें बुराई और नफरत के लिए कोई जगह न हो। रोजेदार अल्लाह की इबादत करते हुए अल्लाह की नेक राह पर चलें। सिर्फ सुबह सहरी करके दिनभर भूखे प्यासे रहकर शाम को इफ्तार करने का ही नहीं नाम रोजा नहीं।
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सभी मुसलमानों को पाबंदी के साथ रोजा रखना चाहिए। इसके साथ ही रोजा रखने में दिनभर रोजेदार कुछ खाता पीता नहीं है, इसलिए शारीरिक मशीनरी को आराम मिल जाता है, वह साफ और बेहतर हो जाती है।

इससे ब्लड प्रेशर, खून का गाढ़ापन, मधुमेह, लीवर आदि की खराबी जैसी बीमारियां खुद ब खुद ठीक हो जाती है, शरीर का वजन कम हो जाता है। नमाज अदा करने से शारीरिक कसरत भी हो जाती है। जिसका लाभ भी शरीर को मिलता है। जो लोग रोजा रखकर बुराइयों में लिप्त रहते हैं, उन्हें मुकद्दस माहे रमजान में भी रोजे का वह सवाब नहीं मिल पाता जो मिलना चाहिए।  

नहीं हुआ चांद का दीदार, रोजा कल से
मुकद्दस माहे रमजान को लेकर जामा मस्जिद में रुयते हिलाल कमेटी की बैठक हुई। इसमें उलमा ने बताया कि, देर रात तक चांद नजर नहीं आया। इससे पहला रोजा रविवार 28 मई को रखा जाएगा। इसके साथ ही पवित्र माह रमजान शुरू हो जाएगा।

बैठक में शहर काजी हाजी मरगूब कादरी नौशाही ने कहा कि शुक्रवार को चांद नजर नहीं आया। इसलिए 27 मई को तरावीह शुरू होगी, जो अंतिम रमजान तक पढ़ी जाएगी। पहला रोजा 28 मई को रखा जाएगा। रमजान का यह पहला अशरा होगा, जो रहमतों का कहलाता है।

दूसरा निजात, तीसरा अशरा जहन्नुुम की आग से छुटकारा दिलाता है। पिछले साल की तरह ही दिलशाद मैरी होम में सातवें दिन तरावीह में कुरआन मुकम्मल किया जाएगा।  

जामा मस्जिद के इमाम ने सभी लोगों से रोजा रखने की अपील की। हाफिज फहीम ने इस बात पर नाराजगी जताई कि अभी तक नगर में मीट बिक्री की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

इसमें मौलाना इफ्तेखार मिस्वाही, हाफिज फहीम कादरी नौशाही, मौलाना सुहैल कादरी, रईस, हाफिज अब्दुल मतीन, अब्दुल रऊफ शेरी, जाहिद शेरी, हाफिज अब्दुल लतीफ, हाफिज अब्दुल मतीन, हाफिज रईस कुरैशी, हाफिज कलीम अनवर, हाफिज अब्दुल लतीफ, काजी मुजीब, मुख्तार हुसैन, अख्तप अली, जाकिर हुसैन, मुहम्मद नूर, रहे।
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