कल्कि भगवान के नामकरण में भिक्षु बनकर आए वेदव्यास, परशुराम व कृपाचार्य
कल्कि कथा के प्रसंग में कहा कि भारत में नियम था कि पहली या फिर आखिरी संतान होती थी तो गर्भवती महिला अपने मायके चली जाती थी। शस्त्र वर्णित ऐंचोड़ा कंबोह ही कम्बोज नगर है। इसी कम्बोज नगर में सुमति मैया आ गईं और यहां चौथी और अंतिम संतान भगवान कल्कि का जन्म हुआ।
यहां अन्नापूर्ण शर्मा ने कल्कि भगवान का लालन पालन किया। नामकरण प्रसंग में कहा कि वेदव्यास, परशुराम और कृपाचार्य भिक्षु का भेष बनाकर नामकरण के लिए आए। भगवान का नामकरण हुआ। उनका नाम कल्कि शर्मा रखा गया। इसके बाद ननिहाल से भगवान संभल ग्राम लौटे।
यहां 68 तीर्थ और 19 कूपों को विधर्मियों से मुक्त कराया। वैदिक धर्म की स्थापना की। भगवान ने माता-पिता के माध्यम से भक्तों को आश्वास्त कराया कि मेरे कई चरण हैं। भक्तों से कहो कि पापाचार का भगवान कल्कि चारों से संहार करेंगे। इस दौरान कथा में वंदे मातरम गूंजा।