संभल। क्षेत्र के गांव सिंहपुरसानी निवासी खिलेंद्र चाहल वर्ष-1988 में बजरंग दल के जिला संयोजक बनाए गए थे। इन दिनों वह आरएसएस में प्रचारक थे और घर को वापस लौटे थे, लेकिन राम मंदिर आंदोलन की जिम्मेदारी मिली तो उन्होंने फिर से घर छोड़ दिया। परिवार वाले चाहते थे कि वह शादी कर लें, लेकिन उन्होंने परिवार का प्रस्ताव ठुकराकर कार्य में जुट गए। राम मंदिर आंदोलन से उनकी जिंदगी का नजरिया ही बदल गया और आज तक घर वापस नहीं लौटे। वह राष्ट्र हित के कार्यों में लगकर परिवार से पहले की तरह दूरी बनाए हुए हैं। खिलेंद्र चाहल बताते हैं कि 1988 से 1994 तक बजरंग दल के जिला संयोजक रहते हुए उन्होंने रामशिला पूजन, अस्थि कलश, राम ज्योति आदि कार्यक्रमों में जिला भर में घूम-घूम कर आंदोलन को गति प्रदान की। संभल में 500 से अधिक गांवों में खुद जाकर शिला पूजन कराया। हजारों राम भक्तों को जेल भरो आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक गिरफ्तार करने की कोशिश में रहे पर गिरफ्तार नहीं हुए। इसके बाद वह भूमिगत हो गए और आंदोलन को गति देते रहे। खिलेंद्र चाहल आज अयोध्या में श्री राम मंदिर में प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि हिंदू समाज ने जो सपना देखा था, वह आज साकार हो रहा है।