चंदौसी (संभल)। आंदोलन और कड़े संघर्ष के बाद 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी। प्राण प्रतिष्ठा को लेकर 1990 में हुए आंदोलन में भाग लेने वाले कारसेवक खुश हैं। बोले, प्रभु श्रीराम के मंदिर का सपना आज पूरा हो रहा है। यह हमारे जीवन का सबसे बड़ा दिन है। कारसेवक इस दिन को अपने जीवन का सबसे खास दिन बनाने के प्रयास में जुटे हैं।
तत्कालीन भाजपा मंडल अध्यक्ष बहजोई निवासी श्यमासुंदर उर्फ गौरीशंकर माल बाबू ने बताया कि 1990 में श्रीराम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर था। कारसेवक अयोध्या कूच करने का प्रयास कर रहे थे। उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा था। बहजोई से मेरे साथ जिनेश जैन, नित्यमूर्ति साहू सहित करीब आठ लोग थे, यहां से निकलते ही हमें गिरफ्तार कर बस से बिजनौर जेल भेजा गया। शाम करीब सात बजे बस बिजनौर पहुंची। वहां कारसेवकों ने जेल की दीवार व गेट को तोड़ दिया था। जिस पर हमें जेल के बाहर ही रोक दिया था। पुलिस प्रशासन की आपस में बात हुई और बस को रात में ही मुरादाबाद जेल भेज दिया। वहां जेल पूरी भरी हुई थी। जिसके बाद मुझे और अन्य साथियों को जेल में तन्हाई बैरक में रखा गया था। जेल में सुबह शाम सभा होती थी। दिन में ढोल, मजीरे के साथ कीर्तन करते थे। हमें सात दिन जेल में रखा गया था। इसके बाद छोड़ दिया गया था।
जेल में भीड़ अधिक होने पर 30 लोगों को थाने से छोड़ दिया था मुचलके पर
चंदौसी। 1990 में जेल भरो आंदोलन चल रहा था। श्रीराम मंदिर को लेकर सभी में उत्साह था। हर कोई जेल जाने को तैयार था। जेल भरने के बाद जगह-जगह अस्थायी जेल बना दी थी। वहां भी पुलिस प्रशासन की व्यवस्था कम पड़ी तो बाद में लोगों को थाने में नाम दर्ज कराकर मुचलकों पर छोड़ना शुरू कर दिया था। 1990 में चंदौसी से काफी संख्या में लोग पहले ही जा चुके थे। इसके बाद पूर्व सीएम कल्याण सिंह के साले विजयपाल सिंह, आचार्य नरेंद्र शर्मा, राममूर्ति शर्मा, रामौतार सचिव, प्रवीण मर्फी, अमित वार्ष्णेय, भरत बाबू भरत सहित 30 लोगों का जत्था घंटाघर पर एकत्र हुआ। वहां से फव्वारा पहुंचे तो पुलिस सभी को कोतवाली ले गई। जेलों में जगह न होने के कारण सभी के नामजद कर निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया था।
भरत बाबू भरत, कारसेवक चंंदौसी।