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बिगड़ा मौसम, तेज हवा के साथ ओलावृष्टि से फसलों को क्षति

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संभल/चंदौसी। बारिश और ओलावृष्टि के साथ तेज हवा ने तमाम किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। गेहूं की फसलें खेत में ही बिछ गईं। आलू खुदाई का वक्त है जो आलू नहीं खुद सका है वह बेमौसम बारिश से खराब होने के आसार हैं। यह स्थिति सामने आने से किसान चिंता में हैं। अब सवाल यह है कि नुकसान की भरपाई कैसे होगी।
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जिले में गुरुवार की रात तेज हवा के साथ बारिश हुई। शुक्रवार को सुबह करीब दस मिनट तक ओलावृष्टि हुई। एक ओला आठ से दस ग्राम तक का था। किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि और बारिश से आलू को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। इससे पहले 12 व 13 दिसंबर 2019 और 6 मार्च 2020 को ओलावृष्टि और बारिश के साथ तेज हवा चलने से फसलें तबाह हुई हैं। जिले के पवांसा क्षेत्र में तेज हवा के साथ ओले पड़े। इससे फसलों को क्षति हुई है। किसानों को पिछली क्षति का मुआवजा मिला नहीं। अब फिर से क्षति हो गई है। ऐसे में क्या करें। रामरायपुर गमटिया के किसान बृजपाल सिंह ने बताया कि उनके ढाई बीघा खेत में गेहूं की फसल थी जो तेज हवा और बारिश में बिछ गई। चालीस प्रतिशत से ज्यादा फसल बर्बाद हुई है। उनके गांव में अधिकतर किसानों के गेहूं खेतों में गिर गए हैं।
शासन से मांगे 12 करोड़ रुपये अभी तक मिला कुछ नहीं
संभल। संभल तहसील में आलू और सरसों की फसल को 12 व 13 दिसंबर को ओलावृष्टि से भारी क्षति झेलनी पड़ी थी। इस क्षति का आकलन कराने के बाद दैवी आपदा आयुक्त को रिपोर्ट भेजी गई थी। इसमें 12 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में देने के लिए दैवी आपदा आयुक्त से मांगे गए थे लेकिन अभी तक कोई आर्थिक मदद नहीं मिल सकी है। ऐसे में सवाल यह है कि किसान की मदद कैसे हो?
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पचास-पचास ग्राम वजन के ओले पड़े
संभल। पवांसा के गांवों में ओलावृष्टि से क्षति हुई है। पचास-पचास ग्राम वजन के ओले कई स्थानों पर पड़े हैं। पवांसा के 18 गांवों में शुक्रवार को सुबह हल्की बूंदाबांदी के साथ ओलों की बौछार हुई। पवांसा गांव में ओले केवल चार मिनट ही पड़े। अन्य स्थानों पर चार से दस मिनट तक ओलावृष्टि हुई है। पवांसा निवासी पवित्र पाल राघव ने एक ओले का वजन किया तो वह आठ ग्राम था। गांव के बच्चों ने तो ओलों को बर्तन में इकट्ठा कर सेल्फी भी ली। संभल के हयातनगर समेत कई गांवों में ओले गिरे हैं। वहीं पवांसा विकास खंड के पवांसा, सिहोरी, बबैना, अतरासी, किसौली, रफीपुर, किरारी, महोरा लखूपुरा, धुरैटा, अजीमाबाद, दतावली, नसीरपुर, आढौल, सैजना, लहराकमंगर, फत्तेहपुर, मिलक धुरैटा, मुजफ्फरपुर में ओले पड़े हैं। रफीपुर के किसानों ने बताया कि उनके यहां पर 50-50 ग्राम वजन के ओले पड़े हैं। किसान पवित्र पाल राघव ने बताया कि सुबह करीब 6:30 बजे उन्होंने अपनी दुकान खोली। दुकान की साफ सफाई कर रहे थे तभी अचानक करीब 6:40 पर हल्की बूंदाबांदी के साथ ओलों की बौछार शुरू हो गई ओले करीब 6 मिनट तक ही पड़े थे। एक ओले को उठाकर तराजू में तोला तो ओला 50 ग्राम का बैठा था।
किसानों की बात
गांव अतरासी निवासी किसान महिपाल यादव ने बताया कि पूर्व में हुई बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल नष्ट हो गई है।
करीमपुर के घेर निवासी किसान देवेंद्र यादव ने बताया कि आज सुबह करीब 6:45 बजे बिना बरसात के ही ओले बौछार शुरू हो गए। भगवान की मेहरबानी रही कि ओले ज्यादा देर तक नहीं पड़े। अहमदनगर थरैसा निवासी राहुल राघव ने बताया कि बर्बाद हुई फसल का जल्दी ही आकलन करके किसानों को मुआवजा दिया जाए। गांव खिरनी निवासी किसान जीत पाल यादव ने बताया कि पूर्व में हुई क्षति के बदले किसान सरकार से मुआवजा की आस में बैठे हैं अब फिर से ओले पड़ गए पर खिरनी में बर्बाद हुई फसलों का कोई आकलन नहीं किया गया है।
असमोली क्षेत्र के गांवों में ओलावृष्टि
ओबरी/असमोली। असमोली ब्लॉक के 17 गांवों में ओलों की बौछार हुई। गुमसानी, मढ़न, फतेहउल्लागंज, अतोरी, अतोरा, शाहपुर चमरौआ, बटौआ, सैदरी, बराही, खाबरी भोला, बैटला, हरथला, बहदीपुर, नवाढ़ा डोरी, दहेली में ओले पड़े हैं। असमोली ब्लॉक क्षेत्र के गांव गुमसानी निवासी किसान मित्रपाल सिंह ने बताया कि सुबह करीब 6:45 बजे ओल गिरे। उसके बाद करीब 8:00 बजे फिर से 10 मिनट ओलों की बारिश हो गई। उन्होंने बताया कि करीब 25 बीघा पीली सरसों की फसल बर्बाद हो गई। शासन और जिला स्तरीय अधिकारी किसानों की बर्बाद हुई फसल का कोई आकलन नहीं कर रहे हैं। जिससे किसान बेहद ही चिंतित हैं।
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