आलू की बंपर पैदावार से जहां आमलोगों को राहत मिली है, वहीं किसानों के लिए आफत हो गई है। मंडी में दाम गिर जाने से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। लागत निकालना मुश्किल हो गया है। किसानों के मुताबिक लाभ की बात क्या करें प्रति क्विंटल दो सौ रुपये का नुकसान हो रहा है।
अगर इसे कोल्ड स्टोरेज में रख दें और बाद में भी कीमतें नहीं बढ़ीं तो घाटा बढ़कर तकरीबन साढ़े चार सौ रुपये प्रति क्विंटल हो जाएगा। सही दामों पर किसानों को खरीदार तक नहीं मिल रहे हैं। स्थानीय मंडी ही नहीं दिल्ली की मंडी में भी यही हाल है। व्यापारियों के मुताबिक, दिल्ली की मंडी में पंजाब के आलू की आवक बढ़ गई है। आपूर्ति ज्यादा होने से सस्ते में आलू बेचना पड़ रहा है।
संभल ही नहीं आगरा, हापुड़ और कासगंज बेल्ट में आलू की पैदावार अच्छी हुई। अबकी बार संभल जिले में 12.5 लाख क्विंटल आलू की पैदावार होने का अनुमान है। इधर, पंजाब के खन्ना और लुधियाना इलाके का आलू भी भरपूर मात्रा में दिल्ली मंडी तक पहुंच रहा है। इससे यहां आलू सरप्लस है, ऐसे में अच्छा दाम नहीं मिल पा रहा है।
किसानों का कहना है कि, आलू की अनुमानित लागत 8,000-10,000 रुपये बीघा आती है। किसान की को मजदूरी के दाम से ही जोड़ दिया जाए तो लागत बढ़कर 13,000 से 15,000 रुपये बीघा तक हो जाएगी। इसमें उपजे आलू की बिक्री के आधार पर अनुमान लगाएं तो ज्यादा से ज्यादा 7,000 से 10,000 रुपये प्रति बीघा के दाम मिल रहे हैं।
आलू से संबंधित प्रमुख तथ्य
37 कोल्ड स्टोरेज
12.50 लाख क्विंटल अनुमानित पैदावार
25.95,459 क्विंटल भंडारण क्षमता
5,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में होती है आलू की खेती
संभल मंडी में आलू के भाव
3797 प्रजाति-350-400 प्रति क्विंटल
पुखराज प्रजाति-300-350 प्रति क्विंटल
चिप्सोना-450-500 रुपये प्रति क्विंटल
लागत से कम दाम पर बिक रहा आलू
संभल। प्रति बीघा उत्पादन लागत 500-600 रुपये प्रति क्विंटल आती है जबकि मंडी में भाव 300-400 रुपये क्विंटल है। ऐसे में किसानों को कम से कम 200 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा हो रहा है। कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष बाबू इरफान का कहना है कि आलू का अबकी बार जितना बुरा हाल है। इतना पहले कभी नहीं हुआ। आगे क्या होगा? अभी कुछ नहीं कह सकते।