संभल। सिरसी और नूरियो सराय में तीसरी मोहर्रम को अलम मुबारक और जुलजुनाह का जुलूस निकाला गया। साथ ही कर्बला के प्यासों की याद में ठंडे पानी, शर्बत और चाय की सबीलें लगाई गईं।
इससे पहले मजलिस में मौलाना ने कहा कि कर्बला हमें इंसानियत का पैगाम देती है। हमें जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। मां-बाप के साथ बेहतरीन सलूक करना चाहिए। उनसे कभी भी ऊंची आवाज में बात नहीं करनी चाहिए। हमें कर्बला ने हर एक रिश्ते की अहमियत बताई है। कहा कि इमाम हुसैन के छह माह के बेटे हजरत अली असगर को तीर मारकर शहीद कर दिया था।
मजलिस के बाद मोहल्ला दालान में मोहम्मद शफीक दालानी के अजाखाने से अलम मुबारक का जुलूस बरामद हुआ, जिसमें अंजुमन महाफिजे अजा, अंजुमन हुसैनी, अंजुमन शमीम ए इमाम और अंजुमन फैजे पन्जेतनी ने नोहा ख्वानी व सीनाजनी की। जुलूस अजाखाना दालान में जाकर खत्म हुआ। दूसरी ओर, मोहल्ला शर्की में सरदार हुसैन उर्फ बुंदु के मकान पर हुई मजलिस में मौलाना ने हजरत इमाम हुसैन के मसाइब बयान किए।
मजलिस के बाद शबीहे जुलजुनाह का जुलूस बरामद हुआ, जिसमें अंजुमन जुल्फकारे हैदरी, अंजुमन गुलदस्ते हैदरी, अंजुमन हाशमी, अंजुमन हैदरी, अंजुमन पन्जेतनी, अंजुमन दिलदारे हुसैनी, अंजुमन कारवाने हुसैनी, अंजुमन सफ़ीना ए अजा और अंजुमन मीसम ए अजा ने नोहा पढ़ा और मातम किया। जुलूस निर्धारित मार्ग से होता हुआ इमाम बारगाह शर्की सादात में समाप्त हुआ।
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सत्य के मार्ग पर चलने की दी प्रेरणा
संभल। नूरियो सराय में मोहर्रम के तीसरे दिन इमामबाड़ा हाजी अजहर हुसैन में मजलिस के बाद अलम का जुलूस निकला। इसमें अजादारों ने मातम व नोहा पेश किए। मजलिस में मौलाना ने इमाम हुसैन की शहादत से सीख लेकर सत्य के मार्ग पर चलने और जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए हमेशा तैयार रहने पर जोर दिया। मजलिस के बाद अलम बरामद किया गया, जिसकी मौजूदा लोगों ने जियारत की। मरसिया रहबर हुसैन, सलीम मेहंदी, शाने अब्बास, शाहिद आदि ने पढ़ा। संवाद