अमरोहा। अमरोहा-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे के लिए भूमि चिह्नीकरण और सर्वेक्षण का कार्य जारी है। एआईजी स्टांप की ओर से विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलओ) को पत्र भेजकर अधिगृहीत की जाने वाली भूमि का ब्योरा मांगा गया है। इसमें संबंधित गांवों की गाटा संख्या, अधिगृहीत होने वाले क्षेत्रफल तथा भूमि के सर्किल रेट से जुड़ी जानकारी शामिल है। इसके बाद भूमि का मूल्यांकन कर अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
करीब 116.85 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित अमरोहा-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे का लगभग 44 किलोमीटर हिस्सा अमरोहा जिले से गुजरेगा। यह एक्सप्रेसवे प्रयागराज-मेरठ गंगा एक्सप्रेसवे के मंगरौला टी-प्वाइंट से जुड़ते हुए हरिद्वार तक जाएगा। परियोजना के पूरा होने के बाद अमरोहा से हरिद्वार की दूरी कम होगी। साथ ही जिले में औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। अमरोहा-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे क्षेत्र में उद्योग, पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। हालांकि परियोजना की सफलता के लिए भूमि अधिग्रहण, उचित मुआवजा और किसानों की आपत्तियों का समयबद्ध समाधान भी उतना ही जरूरी होगा।
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800 से अधिक किसानों की भूमि होगी अधिगृहीत
परियोजना के तहत जिले के 800 से अधिक किसानों की कृषि भूमि अधिगृहीत होने की संभावना है। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर उद्योग, वेयरहाउस, होटल, पेट्रोल पंप, लॉजिस्टिक हब और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान विकसित किए जाएंगे। इससे क्षेत्र में निवेश बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन सभी अभिलेखों का सत्यापन कर रहा है।
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62 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
परियोजना के दायरे में अमरोहा जिले की हसनपुर और धनौरा तहसील के 62 गांव शामिल किए गए हैं। हसनपुर क्षेत्र के मंगरौला, पाइंदापुर मुस्तकम, पिपलौती खुर्द, रूखालू, सिकरौली, गुलामपुर, भैंसरोली, करनखाल, बाईखेड़ा, लुहारी खादर, सोहरका, दीपपुर, आगापुर कला, मछरई, याकूबपुर, समला, बसेड़ा खुर्द, अब्दीपुर, कटाई और पूठी सहित कई गांव इस परियोजना की जद में आएंगे। वहीं धनौरा क्षेत्र के अटारी, मुरीदपुर, मीरपुर, बल्दाना, वस्तौरा माफी, जलालपुर, मोहम्मदी, कौराला, रिछोटी, पारा खालसा और वलीपुर समेत अन्य गांव भी एक्सप्रेसवे से जुड़ेंगे।
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मंगरौला से हरिद्वार तक बनेगा नया संपर्क मार्ग
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे के मंगरौला एंट्री प्वाइंट से हरिद्वार तक जाएगा। इस परियोजना को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के बीच सहमति बन चुकी है। बीती 9 अप्रैल को यूपीडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर प्रभावित गांवों के बंदोबस्ती मानचित्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने संबंधित गांवों के नक्शों का डिजिटलीकरण कर उन्हें उपलब्ध करा दिया है। अब सर्वेक्षण के आधार पर भूमि अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
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एलाइनमेंट को लेकर किसानों का विरोध जारी
जहां एक ओर एक्सप्रेसवे को विकास की नई राह माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रस्तावित एलाइनमेंट को लेकर किसानों में नाराजगी भी बनी हुई है। करीब 12 गांवों के किसान लगातार विरोध जता रहे हैं। किसानों का कहना है कि नए एलाइनमेंट में उनकी उपजाऊ कृषि भूमि को शामिल कर लिया गया है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी। उनका आरोप है कि पहले प्रस्तावित मार्ग में कम उपजाऊ भूमि शामिल थी, लेकिन बदलाव के बाद अधिक उपजाऊ खेत अधिग्रहण की जद में आ गए हैं। किसानों ने प्रशासन से एलाइनमेंट की दोबारा समीक्षा करने की मांग की है।
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सर्किल रेट में फिलहाल बढ़ोतरी की संभावना नहीं
निबंधन विभाग जिले की सभी गाटा संख्याओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने में जुटा है। एआईजी स्टांप अनूप कुमार सिन्हा के अनुसार जिले की लगभग पांच लाख गाटा संख्याओं का शत-प्रतिशत डेटा फीड किया जा चुका है। फिलहाल गंगा एक्सप्रेसवे की जद में आने वाले गांवों के सर्किल रेट में तत्काल बढ़ोतरी की संभावना कम है। हालांकि भूमि मूल्यांकन के बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ेगी।
एसएलओ को एक पत्र भेजा गया है। जिसमें गंगा एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहण की जाने वाली जमीन की जानकारी मांगी गई है। कितना क्षेत्रफल इसके लिए चिन्हित किया जा रहा है। गाटा संख्या मांगी गई है। कितने गांवों की कितनी जमीन इस एक्सप्रेसवे में आएगी। पूरा विवरण मांगा गया है। अनूप कुमार सिन्हा, एआईजी स्टांप
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अभी शासन से कोई नई गाइडलाइन नहीं मिली है। जमीन अधिग्रहण से लेकर दूसरी किसी प्रक्रिया के संबंध में कोई नया निर्देश नहीं है। जो भी कार्रवाई की जाएगी वह शासन के अनुसार की जाएगी। पुष्करनाथ चौधरी,विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी