चंदौसी। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हाईस्कूल की विज्ञान और गृह विज्ञान विषयों की प्रयोगात्मक परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब इन विषयों की प्रयोगात्मक परीक्षाएं स्कूल स्तर पर नहीं होंगी। यूपी बोर्ड अब सीधे अपनी निगरानी में इन परीक्षाओं का आयोजन कराएगा।
पुरानी व्यवस्था के तहत, स्कूल के शिक्षक ही अपने विद्यालय में इन परीक्षाओं को करवाते थे। बोर्ड ने इस पुरानी प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। इसका उद्देश्य कॉपियों और नंबरों की जांच को अधिक सटीक बनाना है। नई व्यवस्था से छात्र-छात्राओं के प्रयोगात्मक ज्ञान और समझ का सही आकलन हो सकेगा।
उन्हें केवल कॉपियों पर लिखने के बजाय प्रयोगशाला में अपनी व्यावहारिक कुशलता भी दिखानी होगी। बोर्ड स्तर से परीक्षा कार्यक्रम तय किया जाएगा और उसी के अनुसार विद्यार्थियों का मूल्यांकन होगा। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में स्कूलों की भूमिका सीमित हो जाएगी। डीआईओएस सीपी सिंह ने बताया कि नए नियम की जानकारी जिले के सभी विद्यालयों को दी जा रही है। यह बदलाव शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार लाएगा।
छात्रों को मिलेगी व्यावहारिक शिक्षा
नए नियम के बाद विज्ञान वर्ग के छात्र-छात्राओं को प्रयोगशालाओं में जाना होगा। उन्हें रसायनों के प्रयोग, उपकरणों के संचालन और उनके परिणामों को बारीकी से सीखना होगा। यह बदलाव उनके सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक कौशल से जोड़ेगा। इससे उनकी समझ और दक्षता में वृद्धि होगी।
गृह विज्ञान में भी बढ़ेगी दक्षता
इसी प्रकार, गृह विज्ञान विषय की छात्राओं को भी लाभ मिलेगा। उन्हें अपने पाठ्यक्रम से जुड़े घरेलू और व्यावहारिक कार्यों का लगातार अभ्यास करना पड़ेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि वे केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें। बोर्ड का यह कदम छात्रों की समग्र शिक्षा को मजबूत करेगा।