आलू की सरकारी खरीद शर्तों में उलझ कर रह गई है। इससे किसानों को कोई लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है। शर्तों की वजह से किसान खरीद केंद्र से लौटाए जा रहे हैं। नतीजतन जिले में सरकार की ओर से संचालित आलू क्रय केंद्र पर अभी तक एक किलोग्राम भी आलू नहीं खरीदा जा सका है।
किसानों को अपना आलू बेचने के लिए मंडी में ही जाना पड़ रहा है जहां भाव कम होने से किसानों की लागत नहीं मिल रही है। यही हाल मुरादाबाद, रामपुर, संभल, बिजनौर का भी है। मंडल के सिर्फ अमरोहा जिले में अभी तक 200 क्विंटल आलू की खरीद सरकारी केंद्र पर हुई है।
संभल जिले में उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिक विपणन संघ की ओर से चंदौसी स्थित बजरंगबली कोल्ड स्टोरेज में 12 अप्रैल को आलू क्रय केंद्र खोला गया था। क्रय केंद्र पर अब तक 90 किसानों ने अपना आलू बेचने के लिए संपर्क किया लेकिन जब इन किसानों को क्रय केंद्र के प्रभारी ने शर्तें समझाईं तो किसानों को मायूस होना पड़ा।
असल में क्रय केंद्र पर सिर्फ 30-55 एमएम का आलू ही खरीदा जाना है। यदि किसी किसान के पास एक क्विंटल आलू है तो उसमें 30-55 एमएम का आलू 10-20 किलोग्राम ही निकलेगा। अब सवाल यह है कि सरकारी क्रय केंद्र पर आलू बेचने के बाद अस्सी प्रतिशत आलू का किसान क्या करे।
इस स्थिति में किसानों ने खुले बाजार में आलू बेचने का निर्णय लिया और किसी क्रय केंद्र पर आलू की सरकारी खरीद नहीं हो सकी। इसके चलते किसानों को लाभ देने की मंशा पर ही सवाल खड़े हो गए। हालांकि सरकारी तंत्र इसे अपनी उपलब्धि मान रहा है।
सरकार खरीद रही स्टैंडर्ड साइज के आलू
संभल। आलू का स्टैंडर्ड साइज 30-55 एमएम होता है, जबकि 30 एमएम से छोटे आलू को अंडर साइज और 55 एमएम से बड़े साइज को ओवर साइज माना जाता है। जिला उद्यान अधिकारी ने जगदीश प्रसाद ने बताया कि स्टैंडर्ड साइज का आलू ही चिप्स कंपनियां खरीदती हैं।
वहीं बुवाई में सीड ड्रिल में यही आलू काम आता है। अंडर और ओवर साइज के आलू से बुवाई नहीं हो सकती है। सरकार ने इसीलिए अपने मानक में स्टैंडर्ड साइज का आलू रखा है। वहीं किसानों का कहना है कि,उनके पास 30 एमएम से 100 एमएम तक का आलू है। यदि 30-55 एमएम का आलू छांटकर केंद्र पर बेचते हैं तो सिर्फ 10-20 प्रतिशत आलू ही बिक पाएगा। बाकी आलू का क्या करेंगे।
अफसर बोले- मार्केट में सुधार, किसान बोले-धोखा
संभल जिले के जिला उद्यान अधिकारी जगदीश प्रसाद का दावा है कि 12 अप्रैल से पहले मंडी में आलू का भाव 300-350 रुपये प्रति क्विंटल था लेकिन जब सरकारी खरीद केंद्र खुला तो बाजार भाव सुधरने लगा। किसानों को मंडी में बिना ग्रेडिंग का आलू बेचने की छूट है। बिना ग्रेडिंग के आलू का भाव ठीक ठाक मिल रहा है।
इसलिए किसान अपने आलू की ग्रेडिंग के लिए तैयार नहीं है और क्रय केंद्र सूने पड़े हैं। वहीं दूसरी ओर किसान उद्यान विभाग के दावे को खारिज कर रहे हैं उनका कहना कि ग्रेडिंग की शर्त लगाकर सरकार ने किसानों के साथ छल किया है। आलू खरीदना था तो जो पैदावार है उसको खरीदा जाता, अब साइज की बंदिश लगा दी गई तो शेष बचे हुए आलू का क्या होगा।
जिले में आम तौर पर 20 एमएम से लेकर 100 एमएम तक का आलू है। यदि सिर्फ 30-55 एमएम के साइज का आलू खरीदा जाएगा तो फिर बाकी आलू की बिक्री के लिए किसान कहां जाएगा। क्रय केंदों पर आलू न खरीदे जानेे और मंडी में अच्छा भाव न मिलने की वजह से आलू किसान परेशान हैं।
आलू क्रय केंद्र पर बिक्री के लिए यह शर्तें
शर्त नंबर एक- 30-55 एमएम साइज का आलू होना चाहिए।
शर्त नंबर दो- साफ सुथरा होना चाहिए आलू।
शर्त नंबर तीन-पेमेंट के लिए आईडीप्रूफ और बैंक पासबुक देनी होगी।
शर्त नंबर चार- आलू की बिक्री के लिए किसान बही लेकर जाना होगा।