संभल जिले में लखौरी जलालपुर की तरह कई और ऐसे गांव हैं, जहां प्रदूषित पानी लोगों को बीामर कर रहा है। लोग बीमार होकर जान गवां रहे हैं, लेकिन प्रशासन का ध्यान इन गांवों की तरफ नहीं है। दोनों ही गांवों में खासकर गरीबों के पास स्वच्छ पेयजल का साधन नहीं है। वे प्रदूषित पानी पीकर लगातर बीमार हो रहे हैं।
जिले के लखौरी जलालपुर में कैंसर से दो वर्ष में सात मौत हुईं, जबकि सिंहपुरसानी में तीन वर्ष के दौरान बीस मौत हो चुकी हैं। इसमें कैंसर पीड़ित भी शामिल हैं। सिंहपुरसानी की हालत यह है कि अगर किसी को खांसी और बुखार भी आ जाए, तो भी लोगों को कैंसर का डर सताने लगता है।
लखौरी जलालपुर में हैंडपंप पीला पानी उगल रहे हैं, सिंहपुरसानी गांव में भी यही स्थिति है। गांव के लोग तीन चार वर्षों से पीले और प्रदूषित पानी की समस्या झेल रहे हैं। सरकारी तंत्र से जब कोई राहत नहीं मिली, तो लोगों ने अपने खर्चे पर गहरे बोरिंग कराई हैं। जो लोग गहरे बोरिंग कराने की स्थिति में नहीं थे, वे पानी को उबालकर पी रहे हैं।
गांव वालों ने बताया कि एक बार पानी को उबालते हैं और फिर उसे छानकर पीते हैं, लेकिन कई बार जब पानी उबालने और छानने का वक्त नहीं होता, तो गंदा पानी ही पी लेते हैं। पानी कितना गंदा इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि जो वाटर फिल्टर दूसरे स्थानों पर चार से छह महीने चल सकता है, लेकिन ये फिल्टर यहां पर महीने दो महीने में ही खराब हो जाता है। गांव के सचिन चाहल ने दिखाया कि तीन दिन में ही फिल्टर में काली परत जमने लगी।