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संभल में लगातार बढ़ रहा प्रदूषण, प्रशासन उदासीन

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जपुरा में सड़क किनारे जलते कूड़े के ढेर से उठता धुआं। - फोटो : SAMBHAL
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संभल। संभल जिले की हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी की ओर प्रदूषण को लेकर समय-समय पर दिए गए आदेशों के क्रम में जिला प्रशासन हरकत में तो आया लेकिन कुछ स्थानों पर अधीनस्थ कर्मचारी और अधिकारी इस ओर अब भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। नगर पालिका और नगर पंचायत के क्षेत्रों में कई स्थानों पर कूड़े के ढेर जलाए जा रहे हैं। जबकि जिलाधिकारी कूड़ा जलाने पर पहले ही पाबंदी लगा चुके हैं।
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पवांसा क्षेत्र में फसलों के अवशेष जलाकर हवा को खराब किया जा रहा है। जिम्मेदार लापरवाह बने हुए हैं। उन्हें प्रदूषण से हो रहे नुकसान की परवाह भले न हो लेकिन अब सांस तो उनकी भी घुट रही है। बढ़ते प्रदूषण के लिए अवैध खनन भी काफी हद तक जिम्मेदार है। रात में बड़े पैमाने पर जिले के कई हिस्सों मे अवैध खनन हो रहा है। रेत और मिट्टी डंपर से ढोई जा रही है।
सड़कों पर पड़ी धूल इसकी गवाही देती है। लेकिन जिम्मेदार मौन हैं। बुधवार की सुबह से ही हल्के बादलों के साथ धुंध नजर आई। सड़कों पर पड़ी धूल वाहनों के चलने पर उड़ रही थी और लोगों की आंखों को बंद कर रही थी।
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दरअसल पिछले एक सप्ताह में जिले की हवा बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। एअर क्वालिटी इंडेक्स लगातार बढ़ रहा है। एक तरफ कूड़े के ढेर और फसलों के अवशेष जलाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर प्रदूषण बढ़ाने के लिए अवैध खनन किया जा रहा है।
जिले में कई स्थानों पर ध़ड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है। रेत से लदी ट्रैक्टर-ट्रालियां और डंपर दिन रात धूल उड़ाते दिखाई दे रहे हैं। जिससे लोग बीमार हो रहे हैं। जिम्मेदार अफसर इस पर रोक लगाने में नाकाम हैं। इतना ही नहीं कई स्थानों पर तो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को इस काले कारोबार की जानकारी है।
कहां होता है अवैध खनन
संभल। तहसील क्षेत्र के सिरसी के नजदीक और गांव फूल सिंहा में रेत का खनन लगातार किया जा रहा है। रात के अंधेरे में इस धंधे को अंजाम दिया जा रहा है। इसके निशान सुबह सूरज की पहली किरण पड़ने के साथ ही देखे जा सकते हैं। सरकारी भूमि को खोद कर किसी पताल की तरह कर दिया है। जहां घूमते समय किसी की नजर बची तो वह किसी खाईनुमा गड्ढे में जा गिरेगा।
इसकी जानकारी स्थानीय लोगों ने कई पुलिस और प्रशासन को दी लेकिन कोई कार्रवाई अमल में नहीं आईं। रेत से भरे डंपर संभल नगर में देर रात प्रवेश करते दिखाई देते हैं। जानकार बताते हैं कि रात भर में करीब पांच लाख रुपये तक का रेत निकाल लिया जाता है। यही हाल मिट्टी के खनन का है। संभल चंदौसी मार्ग स्थित कई गांव ऐसे हैं जहां रात को ही खनन होता है।
जिसमें कोतवाली क्षेत्र के गांव फत्तेहपुर, दहेली, भवानीपुर, शहबाजपुर सूरा नगला और गैर आबाद कई गांव। जहां महीनों से खनन किया जा रहा है। संभल नगर की व्यवसायी भूमियों को पाटा जा रहा है। इससे राजस्व विभाग को आर्थिक हानि हो रही है।
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