चंदौसी के दरगाह जनेटा शरीफ में आयोजित नातिया मुशायरे में कलाम पढ़ते शायर व उपस्थित अकीदतमंद। सं
चंदौसी। दरगाह जनेटा शरीफ के सालाना चार रोजा उर्स ए कादरी चिश्ती मोअज्जमी नौशाही के दूसरे दिन सुबह में फज्र की नमाज के बाद खत्मे कलाम पाक हुआ। उसके बाद हजरत सैयद मेहंदी मियां का कुल शरीफ अदा किया गया। जायरीन ने मजारों पर हाजिरी दी। दोपहर की नमाज के बाद खानकाह परिसर में नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया। मुशायरे में शायरों ने अपने खूबसूरत नातिया कलाम पेश कर श्रोताओं की वाह वाही लूटी।
मुशायरे का आगाज हम्दे पाक से किया गया। मुशायरे की सरपरस्ती दरगाह के सज्जादा नशीन डॉ. हजरत सैय्यद शाहिद मियां कादरी नौशाही ने की और अध्यक्षता डॉ. सैयद अकरम मियां ने फरमाई। नबी की शान में नातिया कलाम पढ़े गए। रामपुर से तशरीफ लाए शायर अशफाक जैदी ने कहा यारब हमारी बात हमेशा बनी रहे, महफिल यह नाते पाक की यूंही सजी रहे। शायर कामिल जनेटवी ने नबी की शान में पढ़ा कि बैठा बैठा सोच रहा हूं क्या क्या होगा तैबा में, चारों जानिब नूर का दरिया बहता होगा तैबा में।
डॉ. शफीक बरकाती ने अपनी अकीदत इस तरह पेश की क्या होगा कोई उसके मुकद्दर के सामने, हो जिसकी कब्र रोजा ए अनवर के सामने। बुरहान संभली ने कहा कि मुद्दत से आरजू है दिले बेकरार की, होठोंं पे मेरे हर घड़ी नाते नबी रहे।
मुशायरे में इमरान सैदपुरी, मशकूर नजमी, फरीद बिसौलवी, डॉ अशफाक जैदी रामपुरी, मशहूद अहमद, शमशाद अली नगरी, इंतेखाब संभली आदि शायरों ने कलाम पेश किए। मुशायरे का संचालन हकीम बुरहान संभली ने किया। सज्जादा नशीन सैयद शाहिद मियां कादरी नौशाही ने दुआ कराई। इस दौरान मुशायरा कनवीनर आफाक नौशाही, सैय्यद सामी मियां, सैय्यद आमिर मियां, मो. रउफ एडवोकेट,अब्दुल हकीम, अब्दुल हमीद आदि शामिल रहे।